30% टूटा सोना, चांदी आधी हुई, लेकिन अतीत की गिरावट इससे भी ज्यादा रही
नई दिल्ली। सोना और चांदी में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना करीब 30 फीसदी और चांदी 54 फीसदी तक टूट चुकी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट इतिहास के सबसे बड़े क्रैश की तुलना में अभी भी छोटी है। ऐसे में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना निवेशकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
इतिहास से मिल रहा धैर्य रखने का संदेश
DSP Netra की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा गिरावट असामान्य जरूर है, लेकिन अभूतपूर्व नहीं। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 1980, 1974, 2008 और 2011 में सोने और चांदी ने इससे कहीं ज्यादा बड़ी गिरावट दर्ज की थी। केडिया एडवाइजरी ने भी इस आकलन से सहमति जताते हुए कहा कि कमोडिटी बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं हैं।
रिकॉर्ड हाई से तेजी से फिसले दाम
जनवरी 2026 में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव, मुनाफावसूली और बाजार में करेक्शन के चलते इसकी कीमत गिरकर 3,942 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। यानी कुछ ही महीनों में करीब 30 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
चांदी में गिरावट और भी ज्यादा रही। यह 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से टूटकर 55.6 डॉलर प्रति औंस तक आ गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
जब 71% तक टूट गया था सोना
रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 1980 के बाद सोना 71 फीसदी तक गिर गया था। उस गिरावट के बाद बाजार को स्थिर होने में करीब 20 वर्ष और पुराने रिकॉर्ड तक पहुंचने में लगभग 28 साल लग गए। इसी तरह 1974, 2008 और 2011 में भी सोने में 34 से 49 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली थी।
चांदी का इतिहास और भी ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला
चांदी हमेशा से अधिक अस्थिर रही है। वर्ष 1980 में इसके दाम 93 फीसदी तक टूट गए थे। उस ऐतिहासिक गिरावट के बाद कीमतों को पुराने रिकॉर्ड तक लौटने में तीन दशक से ज्यादा का समय लगा। 2011 के बाद भी चांदी करीब 77 फीसदी तक फिसल गई थी।
क्या अभी खरीदारी का मौका है?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट को अंतिम तल मानना जल्दबाजी होगी। बाजार में करेक्शन का दौर अभी जारी है और यह कहना मुश्किल है कि कीमतें कब स्थिर होंगी। निवेशकों को भावनाओं के बजाय लंबी अवधि की रणनीति, जोखिम क्षमता और चरणबद्ध निवेश पर ध्यान देना चाहिए। इतिहास बताता है कि कीमती धातुएं गिरावट के बाद दोबारा संभलती जरूर हैं, लेकिन इसमें कई महीने ही नहीं, कई साल भी लग सकते हैं।
निवेशकों के लिए संदेश
सोना और चांदी की मौजूदा कमजोरी चिंता जरूर बढ़ाती है, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे दौर पहले भी आ चुके हैं। इसलिए घबराहट में फैसले लेने के बजाय बाजार के रुझान, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर निवेश रणनीति बनाना अधिक समझदारी होगी।