नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 तेजी से नजदीक आ रही है। अगर आपने अभी तक अपना ITR दाखिल नहीं किया है, तो अब और देरी करना भारी पड़ सकता है। समय सीमा चूकने पर सिर्फ लेट फीस ही नहीं, बल्कि ब्याज, भारी जुर्माना और कई अन्य कानूनी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा टैक्स रिफंड में देरी, नुकसान (Loss) को आगे ले जाने का मौका छूटना और संशोधित रिटर्न दाखिल करने में अतिरिक्त शुल्क जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समय में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक, दस्तावेजों की कमी या तकनीकी दिक्कतों के कारण कई लोग समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते। ऐसे में बेहतर यही है कि अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते ITR दाखिल कर दिया जाए।
1. देनी पड़ेगी लेट फीस
यदि कोई करदाता 31 जुलाई के बाद अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करता है तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। यदि टैक्सेबल आय 5 लाख रुपये तक है तो 1,000 रुपये और 5 लाख रुपये से अधिक आय होने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है। इसलिए समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी है।
2. संशोधित रिटर्न में देरी भी पड़ेगी महंगी
अगर आपने समय पर ITR दाखिल कर दिया, लेकिन बाद में उसमें कोई गलती सामने आती है और उसे निर्धारित समय में ठीक नहीं किया जाता, तो भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। नियमों के तहत देरी से संशोधित रिटर्न दाखिल करने पर 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक की फीस लग सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने के बाद उसकी पूरी जानकारी ध्यान से जांचना जरूरी है।
3. आय छिपाने पर 200% तक जुर्माना
यदि कोई व्यक्ति टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर अपनी आय कम दिखाता है या गलत जानकारी देता है, तो आयकर विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है। ऐसे मामलों में देय टैक्स का 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा जांच और अन्य कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए ITR में सभी आय स्रोतों की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।
4. नकद लेन-देन के नियम तोड़े तो भी कार्रवाई
आयकर कानून के तहत नकद लेन-देन को लेकर भी सख्त नियम हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमों के विपरीत 2 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद राशि स्वीकार करता है, तो धारा 269ST और 271DA के तहत जितनी राशि नकद ली गई है, उतनी ही रकम तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए बड़े भुगतान हमेशा बैंकिंग माध्यम से ही करना बेहतर माना जाता है।
5. सेल्फ-असेसमेंट टैक्स नहीं चुकाया तो बढ़ेगा बोझ
यदि ITR भरते समय किसी करदाता पर सेल्फ-असेसमेंट टैक्स बकाया निकलता है और वह समय पर जमा नहीं किया जाता, तो धारा 140A और 221 के तहत कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में बकाया टैक्स पर ब्याज के साथ अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में पेनल्टी बकाया टैक्स के बराबर तक हो सकती है।
समय पर ITR दाखिल करने के फायदे
समय पर रिटर्न दाखिल करने से केवल जुर्माने से ही बचाव नहीं होता, बल्कि कई अन्य लाभ भी मिलते हैं। यदि टैक्स रिफंड बनता है तो वह जल्दी खाते में आ जाता है। रिटर्न में कोई गलती होने पर उसे समय रहते सुधारा जा सकता है। बैंक लोन, वीजा और वित्तीय दस्तावेजों के लिए भी समय पर दाखिल किया गया ITR महत्वपूर्ण माना जाता है।
ITR भरते समय रखें इन बातों का ध्यान
ITR दाखिल करने से पहले सही ITR फॉर्म का चयन करें। बैंक खाते, पैन, आधार और अन्य व्यक्तिगत जानकारी की जांच करें। वेतन, ब्याज, किराया, पूंजीगत लाभ या अन्य सभी आय स्रोतों का सही विवरण दें। यदि कोई टैक्स बकाया है तो उसे पहले जमा करें। रिटर्न दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर करें, क्योंकि इसके बिना ITR दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।
31 जुलाई 2026 की समय सीमा को हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है। कुछ मिनटों की लापरवाही हजारों रुपये के जुर्माने और अतिरिक्त कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसलिए यदि आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो बिना देरी किए इसे पूरा करें और सभी नियमों का पालन करते हुए अपनी टैक्स संबंधी जिम्मेदारी समय पर निभाएं।