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दीपावली 2025: धनतेरस पर रंगोली बनाना क्यों है शुभ, जानें किन डिजाइनों से करना चाहिए परहेज”

DigitalDesk by DigitalDesk
October 16, 2025
in छत्तीसगढ, धर्म, मुख्य समाचार, रायपुर, संपादक की पसंद
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Diwali 2025 Why is making Rangoli on Dhanteras auspicious Find out which design to use
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दीपावली 2025: धनतेरस पर रंगोली बनाना क्यों है शुभ, जानें किन डिजाइनों से करना चाहिए परहेज”

धनतेरस का शुभ आगमन
धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश लेकर आता है। इस पावन अवसर पर लोग अपने घरों को दीपों और रंगोलियों से सजाते हैं ताकि माँ लक्ष्मी और भगवान कुबेर के आगमन का स्वागत किया जा सके। रंगोली इस दिन का सबसे सुंदर और आध्यात्मिक हिस्सा मानी जाती है।

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रंगोली का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रंगोली केवल सजावट नहीं, बल्कि एक सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है। घर के आंगन में रंगोली बनाने से वातावरण में पवित्रता और शांति आती है। कहा जाता है कि रंगोली से देवी लक्ष्मी का स्वागत होता है और वह घर में सुख-समृद्धि का वास करती हैं। यह पारंपरिक कला “सौभाग्य और मंगल” का प्रतीक है।

माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक

धनतेरस के दिन रंगोली बनाना माँ लक्ष्मी के स्वागत का सबसे शुभ तरीका माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर के आंगन में सुंदर, रंग-बिरंगी रंगोली बनी होती है, वहाँ माँ लक्ष्मी स्वयं प्रवेश करती हैं। इसलिए इस दिन विशेष रूप से कमल, दीपक, लक्ष्मी चरण और शंख जैसे डिजाइन बनाए जाते हैं, जो समृद्धि का प्रतीक हैं।

रंगोली से आती है सकारात्मक ऊर्जा

रंगोली न सिर्फ घर को सुंदर बनाती है, बल्कि यह घर के वातावरण में सकारात्मकता भी लाती है। रंगों का कंपन (वाइब्रेशन) मन और आत्मा को प्रसन्न करता है। यह एक तरह की रंग चिकित्सा (कलर थैरेपी) भी है, जो मन की उदासी और थकान को दूर करती है। जब आप घर के द्वार या पूजा स्थल पर रंगोली बनाते हैं, तो यह पूरे परिवार के लिए शुभ ऊर्जा का माध्यम बनती है।

पारंपरिक रंगोली के शुभ प्रतीक
धनतेरस की रंगोली में कुछ विशेष प्रतीकों को शुभ माना गया है

दीपक: प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक।
कमल: लक्ष्मी का आसन और समृद्धि का चिन्ह।
स्वस्तिक: मंगल और सौभाग्य का संकेत।
लक्ष्मी चरण: देवी के घर में आगमन का प्रतीक।
फूलों की आकृति: खुशहाली और सौंदर्य का प्रतीक।

इन सभी डिजाइनों को मिलाकर बनाई गई रंगोली घर में शुभता और आनंद लाती है। धनतेरस के दिन रंगोली बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। टूटी हुई रंगोली न बनाएं: अधूरी या टूटी रंगोली अशुभ मानी जाती है। गंदे या फीके रंग न इस्तेमाल करें: ऐसे रंग नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देते हैं।

डरावनी या अशुभ आकृतियों से बचें: जैसे सांप, बिच्छू या तिरछे निशान।
गलत दिशा में स्वस्तिक न बनाएं: यह शुभता के बजाय दोष उत्पन्न करता है।
रात में अधूरी रंगोली न छोड़ें: इसे अपूर्ण कार्य माना जाता है, जो अशुभ होता है।

रंगोली बनाने का सही समय और स्थान
धनतेरस के दिन रंगोली सुबह सूर्योदय से पहले या संध्या पूजा से पूर्व बनाना शुभ माना गया है। इसे घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और आंगन में बनाना सर्वोत्तम होता है। रंगोली बनाते समय मन को शांत रखें और शुभ मंत्रों का जाप करें। इससे सकारात्मकता और बढ़ जाती है।

रंगोली के लिए कौन से रंग चुनें

धार्मिक दृष्टि से कुछ रंग विशेष माने गए हैं।

लाल रंग: शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक।
पीला रंग: ज्ञान और समृद्धि का संकेत।
हरा रंग: विकास और शांति का रंग।
सफेद रंग: पवित्रता और संतुलन का प्रतीक।
इन रंगों से बनी रंगोली न केवल आकर्षक लगती है, बल्कि घर के वातावरण में शुभ ऊर्जा भी फैलाती है। आजकल बाजार में स्टेंसिल, तैयार डिजाइन और फ्लावर रैंगोलियां बहुत लोकप्रिय हैं। आप चाहें तो फूलों, रंगीन चावल, हल्दी-कुमकुम, या प्राकृतिक रंगों से भी सुंदर रंगोली बना सकते हैं। यह पारंपरिकता और आधुनिकता का सुंदर संगम है। ध्यान रखें—मूल उद्देश्य माँ लक्ष्मी का स्वागत और सकारात्मक ऊर्जा का संचार है।

धनतेरस पर शुभता का रंग

धनतेरस केवल खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आत्मिक समृद्धि और शुभता का पर्व है। रंगोली बनाकर हम न केवल घर को सजाते हैं, बल्कि उसमें सौंदर्य, संस्कृति और आस्था का रंग भरते हैं। इसलिए इस धनतेरस, केवल सुंदर रंगोली ही नहीं, बल्कि शुभ विचार और सच्ची भावना से घर को सजाएं — ताकि माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद सदा बना रहे। धनतेरस पर रंगोली बनाना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक शुभ संकेत है—सकारात्मकता, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक। सही रंगों, प्रतीकों और भावना के साथ बनाई गई रंगोली आपके जीवन में खुशियों और संपन्नता के रंग भर देती है। प्रकाश कुमार पांडेय

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