भारत में डिजिटल क्रांति : इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 107 करोड़ और रोज़ाना UPI पेमेंट की संख्या 75 करोड़ के पार पहुँच गई है
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि पिछले दशक में भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत तेज़ी से विस्तार हुआ है। इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 107 करोड़ से ज़्यादा हो गई है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) हर दिन लगभग 75 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस कर रहा है।
श्री कृष्णन ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबर्स की संख्या लगभग 100 करोड़ तक पहुँच गई है और सरकार के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है।
सरकार के डिजिटल डॉक्यूमेंट स्टोरेज प्लेटफ़ॉर्म, डिजीलॉकर (DigiLocker) के अब 70 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स हैं। UPI, जिसने देश में डिजिटल पेमेंट के तरीके को बदल दिया है, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है।
UPI पेमेंट की संख्या हर दिन करोड़ों में
सरकार के अनुसार, UPI से जुड़े सिस्टम को पहले ही नौ देशों में अपनाया जा चुका है और आने वाले समय में और भी देशों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
श्री कृष्णन ने ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) सिस्टम के ज़रिए कल्याणकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाने के बड़े पैमाने पर भी ज़ोर दिया। सरकार अभी 323 DBT योजनाएं चला रही है और लाभार्थियों को सीधे 51.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा ट्रांसफर किए हैं, जिससे लीकेज कम हुआ है और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में दक्षता बढ़ी है।
2014 के बाद से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आया है। उस समय, देश अपने ज़्यादातर स्मार्टफोन आयात करता था। श्री कृष्णन ने कहा कि आज, स्मार्टफोन भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में से एक बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) काफी बढ़ा है, जबकि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सरकार की कोशिशों को भी तेज़ी मिल रही है। अब तक बारह सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी जा चुकी है, और CG Semi द्वारा लगाई जा रही सेमीकंडक्टर फैसिलिटी का उद्घाटन इस हफ़्ते होने की उम्मीद है।
भारत बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब
ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब सरकार टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भरता पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है और भारत को एक प्रमुख ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के तौर पर स्थापित करना चाहती है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि भारत वैश्विक घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहा है।सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका समेत कई देश एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी के लिए सुरक्षा उपाय और मंज़ूरी देने के नियम बना रहे हैं, क्योंकि साइबर सिक्योरिटी समेत इनके दूरगामी असर हो सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार देश में ही AI मॉडल और क्षमताएं विकसित करने की कोशिशों को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, देश के बड़े पैमाने, टैलेंट पूल और बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए भारत के लिए ज़रूरी है कि वह अहम टेक्नोलॉजी के मामले में अपनी रणनीतिक आज़ादी बनाए रखे।