चीन विज्ञान व स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग और शोध करने में लगा हुआ
है। आए दिन हमें चीनी वैज्ञानिकों द्वारा की जा रही खोजों और शोध कार्यों के
बारे में देखने और सुनने को मिलता है। इस तरह चीन की भूमिका ज्यादा
महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस बीच चीन ने डायबिटीज के इलाज के लिए नया
तरीका ईजाद किया है।
बताया जाता है कि शांगहाई में ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी की एक शोध
टीम ने डायबिटिक ब्लड ग्लूकोज के सेंस-एंड-रिस्पॉन्ड-बेस्ड कंट्रोल के लिए एक
इंजीनियर्ड ओरल-डिलीवरेबल ग्लूकोज-सेंसिंग और फंक्शनल रिस्पॉन्स प्रोबायोटिक
लिविंग दवा तैयार की है, जो डायबिटीज के इलाज के लिए बिल्कुल एक नया
तरीका है।
यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने इस बारे में खोज
की, और इसके नतीजे पिछले दिनों नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए हैं। जो चीन के
साथ-साथ पूरे विश्व के मधुमेह पीड़ित रोगियों के लिए एक अच्छी खबर है।
रिसर्च टीम ने सिंथेटिक बायोलॉजी तकनीक का इस्तेमाल कर एक ऐसे
प्रोबायोटिक को, जिसका सुरक्षा का लंबा इतिहास है, एक "इंटेलिजेंट वर्चुअल
ऑर्गन" में तैयार किया। जिसे मुंह से लिया जा सकता है और यह अस्थायी रूप
से हमारी आंत में रह सकता है। यह रियल टाइम में ब्लड ग्लूकोज में उतार-
चढ़ाव का पता लगा सकता है और अपने आप ग्लूकोज कम करने वाले हार्मोन
निकाल सकता है। जिससे कि रियल-टाइम ब्लड ग्लूकोज लेवल के हिसाब से
थेराप्यूटिक डोज़िंग संभव हो पाती है। ऐसे में बिना ट्रांसप्लांटेशन के मेटाबोलिक
थेरेपी के लिए एक प्रोग्रामेबल, मुंह से लिया जाने वाला सेंस-एंड-रिस्पॉन्ड
प्लेटफॉर्म मिलता है। जो आज तक संभव नहीं था।
यह तरीका डायबिटीज ब्लड ग्लूकोज मैनेजमेंट को इंजेक्शन और दवा के पुराने
मॉडल से बदलकर "ओरल इम्प्लांटेशन और ऑटोनॉमस रेगुलेशन" के नए तरीके
में बदल देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे सही मायने में ऑन-डिमांड
दवा की डिलीवरी और शारीरिक स्तर वाला क्लोज्ड-लूप कंट्रोल मिलता है।
जैसा कि हम जानते हैं कि डायबिटीज दुनिया भर में लोगों के स्वास्थ्य के लिए
खतरा बन चुकी एक बड़ी क्रॉनिक मेटाबोलिक बीमारी बन गई है।
इससे ग्लूकोज़-सेंसिंग एंड फंक्शनल रिस्पांस प्रोबॉयोटिक(गिफ्ट) दुनिया भर में
डायबिटीज वाले करोड़ों लोगों को एक चीनी तरीका देगा जो ज़्यादा सुरक्षित,
हल्का और शरीर की स्वाभाविक प्रवृत्ति के हिसाब से ज़्यादा सही है। जिससे
स्मार्ट लिविंग दवाओं और मेटाबोलिक बीमारियों के सटीक इलाज के वैश्विक
स्तर पर चीन अग्रणी भूमिका निभाएगा।
ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ लाइफ़ साइंसेज़ के प्रोफ़ेसर ये
हाइफ़ेंग के मुताबिक, गिफ्ट डायबिटीज़ में सटीक ब्लड ग्लूकोज़ मैनेजमेंट के
लिए एक नया तरीका देता है। यह ग्लूकोज़ सेंसिंग को ऑन-डिमांड जीएलपी-1
सेक्रिशन के साथ जोड़कर काम करता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैमल सेल-बेस्ड थेरेपी की तुलना में, ओरल
प्रोबायोटिक्स ट्रांसप्लांटेशन से जुड़ी मुश्किलों और इम्यूनोजेनिसिटी के खतरों से
बच सकते हैं। और इंजीनियर्ड बैक्टीरिया की तुलना में जो जीएलपी-1 को
लगातार एक्सप्रेस करते हैं, गिफ्ट बेहतर स्टेबिलिटी, ड्रगगैबिलिटी और सेफ्टी
देता है।
उधर इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर
में डायबिटीज से पीड़ित वयस्कों की संख्या 530 मिलियन से अधिक पहुंच गयी
है। और साल 2050 तक इसके 850 मिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है।
चीन की बात करें तो यहां लगभग 120 मिलियन लोग डायबिटीज की चपेट में
आ चुके हैं। ऐसे में चीनी वैज्ञानिकों ने नया तरीका खोज कर डायबिटीज से
परेशान लोगों के लिए बेहतर जीवन जीने की उम्मीद पैदा कर दी है।
(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)