मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर शुक्रवार को इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने ASI की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट को आधार मानते हुए भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना और हिंदू पक्ष को नियमित पूजा का अधिकार दे दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि अब परिसर में नमाज़ नहीं होगी, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI को पूरे परिसर के संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। फैसले के बाद जहां हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
11वीं शताब्दी में राजा भोज ने शिक्षा और संस्कृति के केंद्र के रूप में बनवाई थी भोजशाला
इतिहासकारों के अनुसार धार की भोजशाला का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने 1034 के आसपास कराया था। इसे सरस्वती साधना और संस्कृत शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। विशाल आंगन, पत्थरों के नक्काशीदार स्तंभ और प्रार्थना स्थल इसकी पहचान रहे हैं। राजा भोज के निधन के बाद भी यहां कई वर्षों तक अध्ययन और धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। बाद में समय के साथ इस परिसर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे और यही विवाद धीरे-धीरे कानूनी लड़ाई में बदल गया।
1935 से शुरू हुआ विवाद, पूजा और नमाज़ को लेकर बनी थी अलग व्यवस्था
ब्रिटिश काल में 24 अगस्त 1935 को धार दरबार की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें इस स्थल को मस्जिद बताते हुए मुस्लिम समुदाय को नमाज़ की अनुमति दी गई थी। 1990 के दशक में हिंदू संगठनों ने इसे सरस्वती मंदिर घोषित करने की मांग तेज कर दी। बढ़ते विवाद के बाद प्रशासन ने मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज़ की व्यवस्था लागू की थी। 2003 में बसंत पंचमी के दौरान हिंसक तनाव के बाद केंद्र सरकार ने सीमित समय के लिए दोनों पक्षों को धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी थी।

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका के बाद शुरू हुआ आधुनिक तकनीक से ASI सर्वे
साल 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला में नमाज़ पर रोक और हिंदुओं को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की। इसके बाद फरवरी 2024 में आधुनिक तकनीक से सर्वे कराने की मांग उठी और 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने ASI को जांच के आदेश दिए। देशभर से आए 75 विशेषज्ञों की टीम ने लगातार 98 दिनों तक परिसर का सर्वे किया। इस दौरान ग्राउंड स्कैनिंग, खुदाई, फोटोग्राफी और संरचनात्मक परीक्षण किए गए। सर्वे की 242 पेज की रिपोर्ट अदालत में सौंपी गई थी।
ASI रिपोर्ट में मिले मंदिर स्थापत्य, देवी-देवताओं की आकृतियां और संस्कृत शिलालेख
सर्वे रिपोर्ट में बताया गया कि परिसर में 188 स्तंभ मिले, जिनकी वास्तुकला मंदिर शैली से मेल खाती है। जांच के दौरान देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन नक्काशी और संस्कृत शिलालेख भी सामने आए। दो स्तंभों पर “ॐ सरस्वत्यै नमः” अंकित पाया गया, जिसे हिंदू पक्ष ने मजबूत प्रमाण बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान ढांचे में प्राचीन मंदिर के अवशेषों का उपयोग किया गया था। कई मूर्तियां और कलात्मक पत्थर भी खुदाई में मिले, जिन्हें सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
फैसले के बाद वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाने की मांग ने पकड़ी रफ्तार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग तेज हो गई है। हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक न्याय बताया है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है, लेकिन फिलहाल धार भोजशाला को लेकर सबसे बड़ा कानूनी फैसला हिंदू पक्ष के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है।