मध्य प्रदेश की चर्चित धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ASI की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि परिसर में मिले स्थापत्य और पुरातात्विक अवशेष मंदिर संरचना की ओर संकेत करते हैं। फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक संगठनों में नई बहस शुरू हो गई है। वहीं अब वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग भी तेज होती दिखाई दे रही है।
98 दिनों तक चले ASI सर्वे में सामने आए कई अहम तथ्य
भोजशाला परिसर की वास्तविक प्रकृति जानने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने करीब 98 दिनों तक विस्तृत सर्वे किया था। इसी रिपोर्ट को अदालत ने सुनवाई के दौरान अहम आधार माना। रिपोर्ट में परिसर के अंदर और आसपास कई ऐसे अवशेष मिलने की बात कही गई, जिन्हें प्राचीन मंदिर स्थापत्य से जोड़ा गया है।
परिसर में मिले 188 स्तंभों ने बढ़ाई मंदिर होने की चर्चा
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार परिसर में कुल 188 स्तंभ पाए गए, जिनमें 106 सीधे खड़े और 82 आड़े स्तंभ शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन स्तंभों की बनावट और नक्काशी पारंपरिक मंदिर वास्तुकला से मेल खाती है। अदालत ने भी इन तथ्यों को अपने फैसले में महत्वपूर्ण माना।
दीवारों पर देवी-देवताओं की आकृतियां और संस्कृत शिलालेख मिले
ASI टीम को जांच के दौरान परिसर की दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं से जुड़ी आकृतियां दिखाई दीं। इसके अलावा दो स्तंभों पर “ॐ सरस्वत्यै नमः” लिखा हुआ भी पाया गया। रिपोर्ट के पेज नंबर 148 में उल्लेख किया गया कि यह संरचना पहले किसी मंदिर का हिस्सा रही हो सकती है। सर्वे में पहले हटाई गई कुछ मूर्तियों का भी जिक्र किया गया, जिन्हें फिलहाल संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।
कमाल मौला दरगाह के निर्माण में पुराने मंदिर अवशेषों के उपयोग का दावा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि वर्तमान ढांचे के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया। ASI के अनुसार यह सामग्री परमारकालीन काल से जुड़ी हो सकती है। इसी आधार पर हिंदू पक्ष लंबे समय से भोजशाला को सरस्वती मंदिर होने का दावा करता रहा है।
फैसले के बाद वाग्देवी प्रतिमा को भारत लाने की मांग हुई तेज
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब धार्मिक संगठनों और कई हिंदू संगठनों ने वाग्देवी की प्रतिमा को विदेश से वापस भारत लाने की मांग तेज कर दी है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है और लोग इसे ऐतिहासिक फैसला बता रहे हैं।





