मध्य प्रदेश के देवास से शादी के नाम पर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। यहां सामूहिक विवाह सम्मेलन के नाम पर 42 युवकों और उनके परिवारों को सुनियोजित तरीके से जाल में फंसाया गया। आरोपियों ने अनाथ आश्रम की लड़कियों से शादी कराने का सपना दिखाया, सोशल मीडिया पर सुंदर लड़कियों की तस्वीरें भेजीं और फिर हजारों रुपए लेकर फरार हो गए। जब तय तारीख पर दूल्हे अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ देवास पहुंचे तो वहां न कोई दुल्हन थी और न ही शादी की कोई तैयारी।
सोशल मीडिया की तस्वीरों से रचाया गया शादी का सपना और फिर शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित परिवारों का कहना है कि आरोपियों ने खुद को सामूहिक विवाह आयोजन से जुड़ा बताया था। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि इंदौर के एक आश्रम की लड़कियों से उनकी शादी कराई जाएगी। दूल्हों को मोबाइल पर लड़कियों की तस्वीरें भेजी गईं, जिन्हें देखकर परिवार शादी के लिए तैयार हो गए। बाद में पता चला कि वे तस्वीरें सोशल मीडिया से उठाई गई मॉडल्स की थीं।
आरोपियों ने शादी के रजिस्ट्रेशन और आयोजन के नाम पर हर परिवार से अलग-अलग रकम वसूली। किसी से ढाई हजार तो किसी से 12 से 20 हजार रुपए तक लिए गए। परिवारों को भरोसा दिलाया गया कि शादी में दहेज और अन्य सामान भी दिया जाएगा।
शादी वाले दिन घंटों इंतजार करते रहे दूल्हे, लेकिन मंडप तक नहीं पहुंची कोई दुल्हन
पीड़ितों के अनुसार उन्हें 24 मई को देवास पहुंचने और अगले दिन शादी होने की जानकारी दी गई थी। कई परिवार किराए की गाड़ियां लेकर रिश्तेदारों के साथ वहां पहुंचे। कुछ लोगों को बताया गया कि विवाह समारोह माता टेकरी क्षेत्र में होगा। लेकिन जब वे मौके पर पहुंचे तो वहां किसी तरह की कोई तैयारी नहीं मिली।
रात तक लोगों को बहाने बनाकर रोका जाता रहा। आरोपियों ने कहा कि “मैडम रास्ते में हैं” और “दुल्हनें पहुंचने वाली हैं”। लेकिन देर रात तक जब कोई नहीं आया और आरोपियों के फोन बंद होने लगे, तब लोगों को समझ आया कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।
बदमाशों ने इतनी चालाकी दिखाई कि दूल्हों को हल्दी-मेहंदी तक लगाने से रोका
इस पूरे फर्जीवाड़े की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने शादी की रस्मों को लेकर भी अलग-अलग निर्देश दिए थे। एक पीड़ित ने बताया कि उसे कहा गया था कि घर पर हल्दी या मेहंदी न लगाएं। दूल्हे की ड्रेस से लेकर पूरी शादी की तैयारी आयोजन स्थल पर कराने का भरोसा दिया गया था।
आरोपियों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए बेहद प्रोफेशनल तरीके से बातचीत की। ऑनलाइन दस्तावेज जमा कराए गए, मोबाइल पर तस्वीरें भेजी गईं और लगातार संपर्क बनाए रखा गया। इसी वजह से परिवारों को आखिरी समय तक शक नहीं हुआ।
पीड़ित परिवारों के हंगामे के बाद पुलिस हरकत में आई, दो आरोपी गिरफ्तार
जब ठगी का पूरा मामला सामने आया तो गुस्साए परिवारों ने आयोजन स्थल पर हंगामा कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को थाने लेकर गई। पूछताछ में आरोपी मुकेश बैरागी ने अपने भाई दिनेश बैरागी पर पूरा मामला डाल दिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क में परिवार के कई सदस्य शामिल थे। आरोप है कि मुकेश, उसकी पत्नी सुनीता, भाई दिनेश और ससुर नरसिंह दास बैरागी मिलकर लोगों को फंसाते थे। पुलिस ने केस दर्ज कर मुकेश और सुनीता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में खुल रहे नए खुलासे, 42 परिवारों के साथ हुई ठगी ने बढ़ाई चिंता
बीएनपी थाना पुलिस के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह ने 42 दूल्हों से लाखों रुपए वसूले। सोशल मीडिया के जरिए भरोसा जीतकर लोगों को फंसाया गया।
इस घटना ने ऑनलाइन रिश्तों और फर्जी विवाह आयोजनों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने पहले भी कहीं इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया है या नहीं।





