देश की राजधानी नई दिल्ली का प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून तक परिसर खाली करने का आदेश दिया है, जिसके बाद इसकी विरासत, इतिहास और खास पहचान को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
सरकार के आदेश के बाद चर्चा में दिल्ली जिमखाना क्लब
आखिर क्यों इतना खास है देश का यह प्रतिष्ठित ठिकाना
सफदरजंग रोड स्थित यह क्लब केवल एक स्पोर्ट्स और सोशल क्लब नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक भारत तक की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि इसकी सदस्यता को देश की सबसे प्रतिष्ठित क्लब सदस्यताओं में गिना जाता है।
- 30 साल इंतजार के बाद मिलती है सदस्यता
- नेहरू से जुड़ा है जिमखाना क्लब का इतिहास
- सरकार के आदेश से चर्चा में आया प्रतिष्ठित क्लब
- ब्रिटिश दौर से सत्ता का खास ठिकाना रहा क्लब
- आखिर क्यों खास माना जाता है दिल्ली जिमखाना क्लब
ब्रिटिश दौर में हुई थी स्थापना
दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 3 जुलाई 1913 को हुई थी। शुरुआती दौर में इसका नाम “इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” रखा गया था। उस समय यह ब्रिटिश अधिकारियों, राजघरानों और प्रभावशाली लोगों का प्रमुख मिलन केंद्र माना जाता था। बाद में 1928 में नई दिल्ली के विकास के दौरान क्लब को सफदरजंग रोड पर करीब 27.3 एकड़ जमीन लीज पर दी गई। इसकी मुख्य इमारत का डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टॉर रसेल ने तैयार किया था, जिन्होंने कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन जैसी ऐतिहासिक इमारतों की रूपरेखा भी बनाई थी।
नेहरू से लेकर राजघरानों तक रहा खास रिश्ता
आजादी के बाद क्लब के नाम से “इंपीरियल” शब्द हटा दिया गया और यह सिर्फ दिल्ली जिमखाना क्लब बन गया।देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस क्लब के ‘वाइस पैट्रन’ रहे थे। वहीं बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह, लेखक खुशवंत सिंह समेत कई नामचीन हस्तियां इस क्लब से जुड़ी रहीं। समय के साथ यह क्लब सत्ता, प्रशासन, कारोबार और उच्च समाज के प्रभावशाली लोगों का प्रतिष्ठित केंद्र बन गया।
30 साल तक का इंतजार, तभी मिलती है सदस्यता
दिल्ली जिमखाना क्लब की सबसे बड़ी खासियत इसकी एक्सक्लूसिव मेंबरशिप मानी जाती है। यहां सदस्य बनने के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है। कई लोगों को सदस्यता पाने के लिए 20 से 30 साल तक इंतजार करना पड़ता है।वर्तमान में क्लब के लगभग 5600 स्थायी सदस्य हैं, जबकि परिवारों और अन्य श्रेणियों को मिलाकर करीब 12 हजार लोग इसकी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि इस क्लब की सदस्यता केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानी जाती है।
सरकार ने क्यों मांगा कब्जा?
केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने क्लब को भेजे आदेश में कहा है कि यह परिसर संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में आता है। सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी आधारभूत ढांचे के लिए इसकी आवश्यकता बताई गई है। सरकार ने लीज डीड के प्रावधानों का हवाला देते हुए परिसर को खाली कराने का निर्णय लिया है। अब इस फैसले के बाद दिल्ली जिमखाना क्लब का भविष्य चर्चा का विषय बन गया है।





