‘डकैत’ फिल्म…पर्दे के पीछे की अनसुनी कहानियां….किसिंग सीन से सेंसर तक, ‘डकैत’ की दिलचस्प दास्तान
10 जुलाई 1987 को रिलीज़ हुई फिल्म डकैत अपने समय की चर्चित फिल्मों में से एक रही, भले ही इसे बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता न मिली हो। राहुल रवैल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सनी देओल और मीनाक्षी शेषाद्री की जोड़ी देखने को मिली थी। फिल्म के 39 साल पूरे होने पर इससे जुड़े कई दिलचस्प किस्से आज भी लोगों को हैरान करते हैं।
किसिंग सीन जिसने मचा दिया था हंगामा
फिल्म का एक किसिंग सीन उस दौर में काफी चर्चा में रहा। बताया जाता है कि मीनाक्षी शेषाद्री इस सीन को लेकर काफी नर्वस थीं। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि सीन को कैसे शूट किया जाएगा। ऐसे में सनी देओल ने उन्हें भरोसा दिलाया और सहज माहौल बनाने की कोशिश की। अंततः दोनों ने यह सीन शूट कर लिया, लेकिन बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे फिल्म से हटा दिया। उस समय ऐसे सीन को लेकर सख्ती आम बात थी।
राखी की एक्टिंग ने पहुंचाया अस्पताल
फिल्म में राखी गुलज़ार ने एक बेहद अहम किरदार निभाया था। शूटिंग खत्म होने के बाद जब वो डबिंग कर रही थीं, तो एक इमोशनल सीन में वो इतनी गहराई से उतर गईं कि जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा और उनके गले की वोकल कॉर्ड सूज गई। हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और एक छोटी सर्जरी भी करानी पड़ी। यह घटना उनके अभिनय के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
मां का रोल करने में झिझक
फिल्म में सुरेश ओबेरॉय, राखी के बेटे के रोल में नजर आए। लेकिन शुरुआत में राखी इस रोल को करने से हिचक रही थीं। वजह यह थी कि इससे पहले वह सुरेश ओबेरॉय के साथ कई फिल्मों में उनकी पत्नी का किरदार निभा चुकी थीं। ऐसे में अचानक मां का रोल करना उन्हें अजीब लगा। हालांकि, निर्देशक राहुल रवैल ने उन्हें समझाया कि वह पहले अमिताभ बच्चन की भी मां और पत्नी दोनों के रोल कर चुकी हैं। इसके बाद राखी ने यह किरदार स्वीकार कर लिया। दिलचस्प बात यह है कि पूरी फिल्म में वह सुरेश ओबेरॉय को “बेटा” कहकर नहीं बुलातीं।
स्टार कास्ट में कई बड़े बदलाव
फिल्म की कास्टिंग भी अपने आप में एक कहानी है। सनी देओल वाला किरदार पहले अमिताभ बच्चन को ऑफर किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। वहीं, मीनाक्षी शेषाद्री की जगह पहले श्रीदेवी को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने भी फिल्म छोड़ दी। इसके अलावा अनुपम खेर और पूनम ढिल्लन को स्पेशल अपीयरेंस के लिए साइन किया गया था, लेकिन आखिर में उन्होंने भी फिल्म में काम नहीं किया।
क्लाइमैक्स से खुश नहीं थे आनंद बक्षी
फिल्म के गीत मशहूर गीतकार आनंद बक्षी ने लिखे थे। जब उन्होंने फिल्म का क्लाइमैक्स देखा, तो वह उससे संतुष्ट नहीं थे। उनका मानना था कि रज़ा मुराद के किरदार को और ज्यादा सख्त सजा मिलनी चाहिए थी, क्योंकि फिल्म में उसका किरदार काफी क्रूर दिखाया गया था।
फूलन देवी से की गई रिसर्च
फिल्म को यथार्थ के करीब लाने के लिए निर्देशक राहुल रवैल ने उस समय चर्चित डकैत फूलन देवी से भी मुलाकात की थी। वह जेल में जाकर उनसे मिले और चंबल के डकैतों की जीवनशैली, खान-पान और रहन-सहन के बारे में जानकारी जुटाई। यह रिसर्च फिल्म की प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए की गई थी।
बजट और कमाई का दिलचस्प गणित
बताया जाता है कि डकैत का बजट करीब 1 करोड़ 84 लाख रुपये था, जबकि फिल्म ने लगभग 3 करोड़ 27 लाख रुपये की कमाई की। इस हिसाब से फिल्म को “सेमी हिट” माना गया। हालांकि, दर्शकों के बीच इसे इसकी दमदार एक्टिंग और कहानी के लिए याद किया जाता है।
भले ही डकैत सुपरहिट न रही हो, लेकिन इसके किरदार, अभिनय और पर्दे के पीछे की कहानियां इसे खास बनाती हैं। सनी देओल की दमदार मौजूदगी, मीनाक्षी शेषाद्री की मासूमियत और राखी का गहरा अभिनय आज भी इस फिल्म को यादगार बनाता है। कुल मिलाकर, डकैत सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि कई दिलचस्प किस्सों और अनुभवों का संगम है, जो आज भी फिल्म प्रेमियों के लिए उतना ही रोचक है।





