पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत के ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसके बावजूद देश में आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखा गया है।
महंगा हो गया कच्चा तेल
तेल मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक कुछ महीने पहले तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसी तरह एलपीजी की वैश्विक कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं।
सरकारी तेल कंपनियां महंगे दामों पर तेल और गैस खरीद रही हैं, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कम कीमत पर बेच रही हैं। इससे कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
हर महीने 30 हजार करोड़ की अंडर-रिकवरी
सरकार ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी झेलनी पड़ रही है।
तेल एवं गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने कहा कि सरकार ने आम जनता पर बोझ कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। इससे केंद्र सरकार पर भी हर महीने लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
भारत के ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। देश का करीब 40 फीसदी कच्चा तेल, 90 फीसदी एलपीजी और 60 फीसदी एलएनजी इसी मार्ग से आयात किया जाता है। युद्ध और तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक बने रहे तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है।
LPG बुकिंग में भी बढ़ोतरी
सरकार के अनुसार पिछले दो दिनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की 87.66 लाख बुकिंग दर्ज की गईं, जबकि लगभग 97 लाख घरों तक सिलेंडर पहुंचाए गए। वहीं कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी 15,400 टन तक पहुंच गई।