दिल्ली में प्रदर्शन पर पहरा, जंतर-मंतर पर घमासान….राजधानी में सुरक्षा का अभेद्य घेरा
दिल्ली में आज सियासी विरोध और सुरक्षा व्यवस्था के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कॉकरोच जनता पार्टी और उससे जुड़े छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन का नाम ‘जंतर-मंतर 2.0’ दिया गया है। लेकिन दिल्ली पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बाद राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस ने सीमाओं पर जांच बढ़ा दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 हजार पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की योजना बनाई गई
जंतर-मंतर पर पहुंचने लगे प्रदर्शनकारी
सुबह से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कुछ लोग पहुंचने लगे। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनधिकृत जमावड़े को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। दक्षिणी दिल्ली के डीसीपी अनंत मित्तल के मुताबिक, अंतरराज्यीय और अंतर-जिला सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस पिकेट बनाए गए हैं और लोगों को रोककर समझाने की कोशिश भी की जा रही है।
होटल ली मेरिडियन के पास समेत कई संवेदनशील स्थानों पर दिल्ली पुलिस, पिंक फोर्स, रैपिड एक्शन फोर्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात किए गए हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है।
मुंबई से दिल्ली रवाना हुए अभिजीत दीपके
इस प्रदर्शन के केंद्र में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं। वह मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हुए है। दीपके ने प्रदर्शन को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत नहीं दिए हैं। उनका कहना है कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर पीछे हटने वाली सीजेपी ने पहले भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था। अब जंतर-मंतर पर नए प्रदर्शन के जरिए पार्टी अपने आंदोलन को आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के कारण यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शनकारी किस तरह अपनी बात रखते हैं और प्रशासन स्थिति को कैसे नियंत्रित करता है।
एसआईआर को लेकर क्यों गरमाया विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। सीजेपी और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची में नामों को हटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल हैं। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।
हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोपों और उनके राजनीतिक निहितार्थों पर अलग-अलग पक्षों के अपने तर्क हैं। ऐसे में जरूरी है कि आरोपों की जांच तथ्यों, आधिकारिक आंकड़ों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं के आधार पर हो। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी से नागरिकों के मतदान के अधिकार का सीधा संबंध है।
मेट्रो, यातायात और आम लोगों की परेशानी
प्रदर्शन का असर केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद रखने की सूचना दी गई है। विभिन्न मार्गों पर यातायात डायवर्जन और सीमाओं पर जांच के कारण लोगों को परेशानी हो सकती है। कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की खबर है।
इसका असर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, यात्रियों, व्यापारियों और दूसरे दैनिक कामों के लिए निकलने वाले लोगों पर पड़ सकता है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि सुरक्षा बनाए रखने के साथ आम नागरिकों की आवाजाही भी यथासंभव सुचारु रहे। लोगों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले मेट्रो और यातायात से जुड़ी ताजा जानकारी जरूर जांच लें।
दिल्ली में आज का दिन सीजेपी के आंदोलन, पुलिस की सख्ती और एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों के लिहाज से अहम है। एक तरफ प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस बिना अनुमति प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सतर्क है। अब निगाहें अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचने और जंतर-मंतर पर आगे की स्थिति पर टिकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विरोध की आवाज और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे कायम रहता है।





