बैगा बस्ती में बनी देश की पहली सड़क – PM जनमन योजना का भोपाल मॉडल कैसे बना देश के लिए नजीर?
तस्वीर सिर्फ एक सड़क की तस्वीर नहीं है। ये आजाद भारत के 77 साल बाद पहली बार मुख्यधारा से जुड़ने वाले उस समाज की तस्वीर है, जिसे अब तक नक्शे में भी ठीक से जगह नहीं मिली थी। हेडलाइन है – “पीएम जनमन योजना – देश की पहली सड़क बालाघाट जिले की बैगा बस्ती में बनी”
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन, जनजातीय समुदाय का जीवन हो रहा आसान। मामला बालाघाट जिले का है। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बालाघाट जिले की बैगा बस्ती में देश की पहली सड़क इन दिनों सुर्खियों में है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत बालाघाट जिले की बैगा बस्ती में बनी देश की पहली सड़क इन दिनों सबका ध्यान आकर्षित कर रही है। पीआईजेएसवाई ग्रामीण सड़क योजना में तैयार यह सड़क पंडाटोला से बिजाटोला तक जाती है। पटसवाड़ा जनपद में 2 सड़क और बनाई गईं हैं। इससे बैगा बाहुल्य 20 गांवों के करीब 3 हजार नागरिकों के लिए आवागमन सुगम हो गया है। मतलब सीधा है – आज तक जहां कच्चा रास्ता भी नहीं था, वहां अब डामर की पक्की सड़क बन गई है।
2. PM जनमन योजना क्या है? क्यों ये सबसे अलग है?
PM-JANMAN यानी प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान। 15 नवंबर 2023 को बिरसा मुंडा जयंती पर पीएम मोदी ने इसकी शुरुआत की थी। टारगेट सिर्फ एक था – वो 75 समुदाय जो आज भी PVTG – Particularly Vulnerable Tribal Groups यानी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह में आते हैं। मध्यप्रदेश में इनमें बैगा, भारिया और सहरिया आते हैं। ये वो समुदाय हैं जिनकी आबादी सबसे कम है, साक्षरता सबसे कम है, और जो सबसे ज्यादा जंगल में रहते हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 28 लाख PVTG लोग हैं, जो 18 राज्यों के 200 जिलों में रहते हैं। इनके लिए 24,000 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। इसमें 11 काम होने थे – पक्का घर, पक्की सड़क, नल से जल, बिजली, मोबाइल मेडिकल यूनिट, आंगनवाड़ी, वन धन केंद्र। और सबसे पहले काम था – सड़क। क्योंकि सड़क नहीं तो एंबुलेंस नहीं, एंबुलेंस नहीं तो अस्पताल नहीं।
3. बैगा बस्ती की सड़क देश की पहली क्यों कहलायी?
निवास का अधिकार: बैगा समुदाय को 2006 के वन अधिकार कानून से पहले तक जंगल में स्थायी निर्माण की इजाजत नहीं थी। सड़क तो दूर की बात थी। PM जनमन पहली योजना है जिसने कहा कि जंगल के अंदर भी PVTG के लिए सड़क बनेगी और इसके लिए वन विभाग से अलग से क्लीयरेंस का रास्ता खोला गया। बालाघाट मॉडल: मध्यप्रदेश पहला राज्य बना जिसने इसे जमीन पर उतारा। पंडाटोला से बिजाटोला तक की ये सड़क PMGSY – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी, लेकिन फंडिंग PM जनमन से हुई। इस टेक्निकल तालमेल के कारण ही इतनी जल्दी सड़क बन पाई। 3000 लोगों पर: पटसवाड़ा जनपद में 2 सड़कें और बनाई गई हैं। एक सड़क से 20 गांव जुड़े हैं। 3000 बैगा आदिवासियों के लिए ये सड़क सिर्फ सड़क नहीं, बाजार, स्कूल और अस्पताल तक जाने का पहला रास्ता है। पहले बारिश में ये गांव टापू बन जाते थे।
4. मध्यप्रदेश सरकार इसे क्यों हाइलाइट कर रही है?
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा योजनाओं का बेहतरीन क्रियान्वयन। इसके दो राजनीतिक और प्रशासनिक मायने हैं –
केंद्र के लिए मैसेजिंग – 2024 में जनमन योजना का ऐलान हुआ था, 2025-26 में इसका सबसे अच्छा क्रियान्वयन मध्यप्रदेश ने दिखाया है। इसलिए MP को मॉडल स्टेट बताया जा रहा है। राज्य के लिए वोट बैंक से ज्यादा – MP में 21% आबादी जनजातीय है। 47 सीटें ST के लिए आरक्षित हैं। बैगा, सहरिया जैसे समुदायों तक पहुंचना मतलब सबसे आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना।
5. चुनौती क्या बची है? सड़क बनने के बाद क्या?
पूर्व कलेक्टर और जनजातीय मामलों के जानकार के अनुसार – सड़क बनना पहला कदम है। अब तीन चीजें देखनी होंगी – रखरखाव कौन करेगा? जंगल के अंदर बनी सड़क पर बारिश में मलवा आता है। PMGSY की 5 साल की मेंटेनेंस गारंटी के बाद पंचायत इसे कैसे संभालेगी? सड़क के साथ क्या आया? क्या इस सड़क के बाद वहां मोबाइल मेडिकल वैन, आंगनवाड़ी, बिजली पहुंची? PM जनमन में 11 चीजें एक साथ आनी थीं। अगर सिर्फ सड़क आई और बाकी नहीं, तो पलायन नहीं रुकेगा। जंगल और विकास का संतुलन: बैगा समुदाय को बीज बचाने वाला समुदाय कहा जाता है। सड़क से बाहर की दुनिया आएगी, तो उनकी जैव विविधता और संस्कृति कैसे बचेगी? ये सबसे बड़ा सवाल है।
बालाघाट की बैगा बस्ती में बनी ये 2-3 किलोमीटर की सड़क, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि एक्सप्रेसवे समय बचाता है, और ये सड़क जिंदगी बचाती है। 77 साल बाद जब एक गर्भवती महिला को खटिया पर नहीं, एंबुलेंस में अस्पताल ले जाया जा सकेगा, तब इस सड़क का असली उद्घाटन होगा। मध्यप्रदेश ने देश की पहली सड़क बनाकर शुरुआत तो कर दी है, अब देखना है कि इस सड़क पर विकास कितनी तेजी से चलता है।





