विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने संगठन को लेकर बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है। पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है।
वहीं उत्तर प्रदेश में भी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को बदलने और आराधना मिश्रा ‘मोना’ को नई जिम्मेदारी देने की चर्चा तेज है। हालांकि 2 अक्टूबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में इसे संभावित बदलाव के तौर पर रिपोर्ट किया गया है, इसलिए इसे अंतिम नियुक्ति मानना जल्दबाजी होगी।
पंजाब में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण?
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और प्रदेश कांग्रेस के भीतर लंबे समय से संगठनात्मक मतभेदों की खबरें आती रही हैं। राजा वडिंग ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद अपना इस्तीफा दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी और सचिन पायलट की भूमिका को लेकर अपनी धारणा भी व्यक्त की, हालांकि उन्होंने कहा कि उनके पास इसका ठोस प्रमाण नहीं है। ऐसे माहौल में परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाना संगठन के सामने मौजूद आंतरिक समन्वय और चुनावी तैयारी दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव है।
परगट सिंह के सामने बड़ी जिम्मेदारी
परगट सिंह का राजनीतिक और खेल, दोनों क्षेत्रों से जुड़ा सार्वजनिक जीवन रहा है। अब उनकी प्राथमिक चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना, विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाना और चुनाव से पहले पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन तक पहुंचाना होगी। इन परिणामों का आकलन चुनाव के दौरान संगठन के प्रदर्शन और पार्टी के आधिकारिक फैसलों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
यूपी में भी संगठन पर फोकस
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन में बदलाव की चर्चा कई सप्ताह से चल रही है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सामने आया है। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस विधायक दल की नेता हैं और पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
रिपोर्टों में प्रदेश अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की संभावनाओं का भी उल्लेख है। कुछ रिपोर्टों में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा की गई है, लेकिन अंतिम संगठनात्मक ढांचे की पुष्टि पार्टी के आधिकारिक ऐलान के बाद ही होगी।
सवाल सिर्फ चेहरा बदलने का नहीं
पंजाब और उत्तर प्रदेश में बदलाव की टाइमिंग बताती है कि कांग्रेस चुनाव से पहले प्रदेश संगठन को पुनर्गठित करने पर जोर दे रही है। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष बदलना अपने आप में चुनावी नतीजे तय नहीं करता। उसके बाद संगठन की कार्यप्रणाली, स्थानीय नेतृत्व का समन्वय, सहयोगी दलों के साथ तालमेल और बूथ स्तर की सक्रियता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होंगे।
इस लिहाज से कांग्रेस के सामने चुनौती केवल नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की नहीं, बल्कि नए नेतृत्व को संगठनात्मक ढांचे में प्रभावी भूमिका देने की भी है। पंजाब में परगट सिंह की नियुक्ति के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि वे संगठन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में अंतिम फैसला होने के बाद नए नेतृत्व की भूमिका और संगठन की दिशा स्पष्ट होगी।





