नई दिल्ली। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस में बड़े पैमाने पर संगठनात्मक फेरबदल की तैयारी चल रही है। पार्टी नेतृत्व 2027 की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव करने जा रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भी नई रणनीति के तहत कई अहम जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
2027 चुनावों से पहले संगठन में फेरबदल की रणनीति
कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी बदलने की संभावना
पार्टी सूत्रों के अनुसार इस पूरी रणनीति के केंद्र में प्रियंका गांधी को लेकर भी नई भूमिका तय की जा सकती है। माना जा रहा है कि संगठन और चुनावी प्रबंधन में उनकी भूमिका को और अधिक मजबूत किया जा सकता है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान द्वारा लिया जाएगा।
पार्टी में यह भी चर्चा है कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के बाद संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। इसी क्रम में कई राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों को बदला जा सकता है।
हाल ही में कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद वहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी बीके हरिप्रसाद को सौंपी गई थी। यह बदलाव पार्टी के भीतर नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है। इसके बाद अब आधा दर्जन से अधिक राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी चल रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस विषय पर एक अहम बैठक हाल ही में हुई थी, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल रहे। बैठक में आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को मजबूत करने और नए चेहरों को जिम्मेदारी देने पर चर्चा की गई।
चुनावी राज्यों पर फोकस
कांग्रेस का मुख्य फोकस उन राज्यों पर है जहां 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। इसके अलावा अगले वर्ष के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव प्रस्तावित हैं।
पार्टी रणनीति के अनुसार इन राज्यों में नेतृत्व को नए सिरे से मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है ताकि स्थानीय स्तर पर संगठन को सक्रिय किया जा सके। हिमाचल प्रदेश को छोड़कर अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से है, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पंजाब में बदलाव की संभावना
पंजाब कांग्रेस में जातीय और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता दोनों एक ही समुदाय से हैं, जिससे संतुलन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में Vijay Inder Singla का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वे राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं और पार्टी का एक प्रमुख हिंदू चेहरा माने जाते हैं। हालांकि दलित नेतृत्व को भी मजबूत करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री Charanjit Singh Channi के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में रणनीतिक बदलाव
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में बीजेपी सरकार को चुनौती देने की कोशिश कर रही है। यहां संगठन में जातीय संतुलन को मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश अध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदों पर अगड़ी जाति के नेता हैं, जिससे दलित वोट बैंक को साधने के लिए बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि यूपी में या तो प्रदेश अध्यक्ष या फिर प्रदेश प्रभारी पद पर दलित नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि सामाजिक समीकरणों को मजबूत किया जा सके। हालांकि पहले बिहार में इसी तरह का प्रयोग अपेक्षित सफलता नहीं दिला पाया था, इसलिए पार्टी इस बार सोच-समझकर कदम उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
संगठन में नए प्रयोग की तैयारी
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आने वाले चुनावों में सफलता के लिए संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार मजबूत करना होगा। इसी वजह से कई राज्यों में नए चेहरों को आगे लाने की योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फेरबदल कांग्रेस की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करना और जातीय-सामाजिक संतुलन को साधना है।
कुल मिलाकर कांग्रेस आने वाले महीनों में बड़े संगठनात्मक बदलाव की ओर बढ़ रही है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो न केवल कई राज्यों के नेतृत्व में परिवर्तन देखने को मिलेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नई जिम्मेदारियों का वितरण हो सकता है। प्रियंका को मिलने वाली संभावित नई भूमिका इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।





