Super El Niño का खतरा: क्या फिर लौटेगा 2015-16 जैसा संकट?
भारत ही नहीं दुनियाभर में इन दिनों तापमान लगातार तेजी बढ़ रहा है। इसकी वजह से लोग भयानक गर्मी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि 2026 का साल सुपर अल नीनो Super El Nino बन सकता है। बता दें यह एक मौसमी पैटर्न है…जिसने साल 1877-78 में भीषण मचा दी थी। लगभग 150 वर्ष पहले यह विनाशकारी अल नीनो आया था। जिसके चलते वैश्विक स्तर पर अकाल के साथ सूखा पड़ा था। ऐसे में लाखों लोगों की मौत हुई थी। अब 150 साल बाद एक बार फिर बढ़ता समुद्र का तापनान और जलवायु में हो रहा परिवर्तन और इसके विकसित होने की संभावना ने चिंता में डाल दिया है।
एक बार फिर जलवायु संकट की आहट सुनाई दे रही है। वैज्ञानिकों और विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि 2026 में सुपर एल नीनो जैसी स्थिति बन सकती है। इसका असर सीधे तौर पर भीषण गर्मी, कमजोर मानसून और सूखे के रूप में दिख सकता है।
क्या होता है सुपर एल नीनो?
सुपर एल नीनो, एल नीनो का बेहद शक्तिशाली रूप होता है। इसमें प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2°C से ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर असर पड़ता है—खासतौर पर भारत के मानसून पर।
आखिरी बार कब आया था बड़ा संकट?
भारत ने आखिरी बार 2015-16 में इस तरह की तीव्र घटना का सामना किया था। उस दौरान बारिश में भारी कमी आई, तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा और खेती-बाड़ी को बड़ा नुकसान हुआ। इससे पहले 1997-98 और 1877-78 के सुपर एल नीनो ने भीषण प्रभाव डाला था—1877-78 में तो देश में भयंकर अकाल तक की स्थिति बन गई थी।
2026 में क्या संकेत हैं?
मई से जुलाई के बीच एल नीनो की स्थिति बनने की 60% से ज्यादा संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि मानसून सामान्य से घटकर करीब 92% रह सकता है—जो सुनने में कम लगे, लेकिन इसके असर बेहद गंभीर हो सकते हैं।
क्यों खतरनाक है यह?
सुपर एल नीनो सिर्फ तापमान नहीं बढ़ाता, बल्कि बारिश के पैटर्न को भी बिगाड़ देता है। इसका सीधा असर खेती, जल संसाधन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। अगर स्थिति बिगड़ी, तो कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। साफ है—अगर सुपर एल नीनो सक्रिय हुआ, तो 2026 भारत के लिए मौसम के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।





