भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शनों को लेकर अब विदेशी फंडिंग का मुद्दा चर्चा में है। अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स CJP और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को आर्थिक मदद दे रहे हैं। 14 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए उनके पोस्ट के बाद यह विवाद और बढ़ गया। मैरी मिलबेन ने भारतीय युवाओं से इस आंदोलन के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने की अपील भी की। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके ने विदेशी नागरिकों के भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने पर सवाल उठाया। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि CJP के प्रदर्शनों का खर्च आखिर कहां से आता है, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के भोजन की व्यवस्था किसने की और क्या विदेशी फंडिंग के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत मौजूद है? फिलहाल, मैरी मिलबेन के दावे को साबित करने वाले सार्वजनिक वित्तीय दस्तावेज या संबंधित डोनर्स की पहचान विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। इसलिए आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर समझना जरूरी है।
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने CJP की फंडिंग को लेकर क्या दावा किया?
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने आरोप लगाया है कि अमेरिका में रहने वाले कुछ ऐसे डोनर्स, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व से असहमत हैं, CJP और अभिजीत दीपके को आर्थिक सहायता दे रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ विदेशी दानदाता अलग-अलग देशों में रूढ़िवादी नेताओं के खिलाफ सक्रिय लोगों को समर्थन देते हैं और इससे राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारतीय युवाओं से CJP के आंदोलन के जवाब में एक शांतिपूर्ण प्रतिआंदोलन खड़ा करने की अपील की। हालांकि, उनके बयान में कथित दानदाताओं के नाम, भुगतान की रकम या धन हस्तांतरण के दस्तावेज सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किए गए। ऐसे में इस दावे को अभी आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि साबित हो चुके तथ्य के रूप में।
अभिजीत दीपके ने विदेशी फंडिंग के आरोप पर क्या जवाब दिया और क्यों उठाया हस्तक्षेप का सवाल?
मैरी मिलबेन के आरोपों पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों को संभालने में सक्षम है और विदेशी नागरिकों को देश के राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि भारतीय नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकी समर्थन लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। इस जवाब से स्पष्ट है कि विवाद अब केवल संगठन की फंडिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विदेशी हस्तक्षेप और भारत की घरेलू राजनीति तक पहुंच गया है। इससे पहले दीपके अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्च को लेकर भी सफाई दे चुके हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी पढ़ाई का खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी की छात्रवृत्ति और एजुकेशन लोन से पूरा हुआ था। हालांकि, किसी व्यक्ति की पढ़ाई के खर्च का स्रोत और उसके संगठन की फंडिंग दो अलग-अलग सवाल हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के भोजन और कथित 70 हजार रुपये के भुगतान का मामला क्या है?
CJP के प्रदर्शनों के दौरान भोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आपके बताए अनुसार, जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था और करीब 70 हजार रुपये के भुगतान को लेकर जानकारी सामने आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में इस विशेष भुगतान की रसीद, भुगतान करने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम और धन के स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए यह कहना कि भोजन का खर्च विदेशी फंडिंग से ही चुकाया गया, फिलहाल उचित नहीं होगा। इस मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए बिल, बैंक लेनदेन, आयोजकों की ओर से जारी हिसाब और भुगतान संबंधी दस्तावेज सामने आना जरूरी है। किसी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था होना अपने आप में विदेशी फंडिंग का प्रमाण नहीं है। खर्च का स्रोत दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकता है।
CJP की फंडिंग पर पहले भी उठे सवाल, सरकारी स्तर पर क्या जानकारी सामने आई?
CJP के प्रदर्शनों और उनके खर्च को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। जुलाई 2026 में जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शनों के संबंध में कथित विदेशी फंडिंग के आरोपों पर विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया था। उस समय मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि उनके पास साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है। इस बयान को न तो विदेशी फंडिंग की पुष्टि माना जा सकता है और न ही आरोपों के पूरी तरह गलत होने का निर्णायक प्रमाण।
किसी संगठन को विदेश से धन मिलने की जांच के लिए उसके बैंक रिकॉर्ड, दानदाताओं का विवरण और लागू नियमों के तहत आवश्यक दस्तावेज देखने होंगे। जब तक ऐसे प्रमाण सार्वजनिक नहीं होते या संबंधित जांच एजेंसी निष्कर्ष नहीं देती, तब तक फंडिंग को लेकर अंतिम फैसला सुनाना जल्दबाजी होगी।
क्या विदेशी फंडिंग से देश में अराजकता फैलाने की कोशिश हो रही है, या आरोपों की जांच जरूरी है?
CJP के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि संगठन को आर्थिक मदद कहां से मिलती है और उस पैसे का इस्तेमाल किन गतिविधियों में होता है। यदि किसी संगठन को विदेश से धन प्राप्त होता है, तो उसके स्रोत और उपयोग की जांच लागू कानूनों के अनुसार की जा सकती है। लेकिन किसी संगठन पर देश में अराजकता फैलाने, बच्चों को गुमराह करने या सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाने के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। मैरी मिलबेन ने विदेशी फंडिंग का दावा किया है, जबकि अभिजीत दीपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर आपत्ति जताई है। इन दोनों पक्षों के बयानों के बीच अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल वित्तीय प्रमाणों का है। कथित 70 हजार रुपये के भुगतान से लेकर विदेशी दानदाताओं की पहचान तक, सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों की पारदर्शिता से ही सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर CJP को अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है।





