चीनी किसान फसल उत्सव: फसल से आधुनिक कृषि और ग्रामीण पुनरुद्धार तक चीन की यात्रा
23 सितंबर को चीन जब नौवां चीनी किसान फसल उत्सव मनाएगा, तो यह सिर्फ खेतों में नई फसल
आने की खुशी का मौका नहीं होगा। इसके जरिए चीन अपनी कृषि की बदलती तस्वीर भी दुनिया के
सामने रखेगा। एक ऐसी तस्वीर, जिसमें खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय के साथ कृत्रिम
बुद्धिमत्ता, स्मार्ट खेती, हरित कृषि, स्थानीय कृषि उत्पादों के ब्रांड और हजारों साल पुरानी कृषि
परंपरा भी शामिल है। यानी आज का यह उत्सव सिर्फ फसल का जश्न नहीं, बल्कि गांवों और कृषि
को आधुनिक बनाने की चीन की कोशिशों की झलक भी है।
चीन के कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्रालय ने 2026 के इस उत्सव की थीम का भाव रखा है,
“फसल से नया अध्याय, ठोस प्रयासों से ग्रामीण पुनरुद्धार।” मंत्रालय का कहना है कि इस आयोजन
में किसान मुख्य भागीदार होंगे, कृषि मुख्य विषय होगी और गांव मुख्य मंच बनेंगे।
इस बार के कार्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्ट कृषि, हरित और अधिक कुशल कृषि तकनीकों के
इस्तेमाल के साथ उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय कृषि उत्पादों और उनके ब्रांड को भी प्रमुखता दी
जाएगी।
2018 में शुरू हुआ किसानों का राष्ट्रीय उत्सव
चीनी किसान फसल उत्सव की शुरुआत 2018 में हुई थी। यह चीन में किसानों के लिए राष्ट्रीय स्तर
पर शुरू किया गया पहला उत्सव है। हर साल इसे शरद विषुव के आसपास मनाया जाता है। चीन की
पारंपरिक कृषि संस्कृति में शरद विषुव का फसल कटाई के मौसम से गहरा संबंध रहा है।
इसलिए इस उत्सव में परंपरा और आधुनिकता दोनों एक साथ दिखाई देती हैं। एक तरफ खेतों में
तैयार फसल है और दूसरी तरफ आधुनिक कृषि तकनीक। 2026 के सरकारी निर्देशों में फसल
संस्कृति, कृषि अर्थव्यवस्था और स्थानीय कृषि उत्पादों के ब्रांड को मजबूत करने पर जोर दिया गया
है।
इसका सीधा मतलब है कि कृषि को केवल खेत में फसल पैदा करने तक सीमित नहीं रखा जा रहा।
उसे बाजार, ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय उपभोग और गांवों की सांस्कृतिक पहचान से भी जोड़ा जा रहा
है।
कम जमीन, लेकिन ज्यादा पैदावार
2026 में चीन के कृषि क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण खबर ग्रीष्मकालीन अनाज के उत्पादन को लेकर आई
है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक इस साल ग्रीष्मकालीन अनाज का कुल उत्पादन
15.0746 करोड़ टन रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 0.7 प्रतिशत अधिक है। गेहूं का उत्पादन
13.8952 करोड़ टन रहा, जिसमें 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
लेकिन इन आंकड़ों में एक और बात ज्यादा महत्वपूर्ण है। ग्रीष्मकालीन अनाज की खेती के लिए
इस्तेमाल होने वाला क्षेत्र 0.2 प्रतिशत कम हुआ, फिर भी प्रति हेक्टेयर पैदावार 0.8 प्रतिशत बढ़कर
5,681.6 किलोग्राम हो गई। यानी खेती के लिए जमीन कम हुई, लेकिन पैदावार बढ़ गई।
यही चीन की कृषि के भविष्य की दिशा को समझने का एक अहम संकेत है। जमीन और पानी जैसे
संसाधन सीमित हैं। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने का रास्ता केवल ज्यादा जमीन पर खेती करना नहीं है।
बेहतर बीज, आधुनिक मशीनें, नई तकनीक और जमीन की प्रति इकाई से ज्यादा उत्पादन हासिल
करना भी उतना ही जरूरी है।
रॉयटर्स ने भी चीन की दीर्घकालिक कृषि रणनीति पर ध्यान दिया है। अप्रैल 2025 की एक रिपोर्ट में
उसने चीन की उस दस वर्षीय योजना का उल्लेख किया था, जिसका लक्ष्य 2035 तक देश की खाद्य
सुरक्षा को और मजबूत करना है। इसमें अनाज उत्पादन बढ़ाने, बेहतर बीज विकसित करने, कृषि
मशीनरी को आधुनिक बनाने और खेती में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
मौसम की चुनौतियों के बीच भी उत्पादन में बढ़ोतरी
कृषि के लिए मौसम हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। 2026 में चीन के कुछ प्रमुख कृषि क्षेत्रों को तेज
गर्मी और भारी बारिश जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रॉयटर्स ने 27 अगस्त की अपनी
रिपोर्ट में मक्का, सोयाबीन और कपास उत्पादक कुछ क्षेत्रों पर इन मौसम संबंधी परिस्थितियों के
असर का उल्लेख किया।
इसके बावजूद ग्रीष्मकालीन अनाज के उत्पादन में बढ़ोतरी यह बताती है कि बेहतर कृषि तकनीक,
उत्पादकता में सुधार और व्यापक कृषि उत्पादन आधार चीन की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका
निभा रहे हैं।
चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार 2026 की पहली छमाही में कृषि उत्पादन के मूल्य वर्धन
में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में सूअर, गोवंश, भेड़ और मुर्गीपालन से मिलने वाले
मांस का कुल उत्पादन 4.3 प्रतिशत बढ़ा।
इसलिए फसल उत्सव को केवल सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखना तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा
होगा। इसके पीछे एक ऐसी कृषि व्यवस्था भी है, जिसे बड़ी आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने
के साथ लगातार आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है।
अब खेतों में भी पहुंच रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता
इस साल के फसल उत्सव की एक खास बात यह है कि सरकारी योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और
स्मार्ट खेती को खास जगह दी गई है।
कृषि मंत्रालय ने स्थानीय स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट खेती के इस्तेमाल के उदाहरण
सामने लाने, हरित और अधिक कुशल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने और बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि
उत्पादों तथा स्थानीय ब्रांडों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है।
लेकिन स्मार्ट कृषि का मतलब केवल खेत में नई मशीनें लगाना नहीं है। आज आधुनिक चीनी कृषि
में उपग्रहों से मिलने वाले आंकड़ों, मौसम के पूर्वानुमान, स्वचालित कृषि मशीनों, स्मार्ट सिंचाई,
बेहतर बीज अनुसंधान और डिजिटल बाजारों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
इस बदलाव का मकसद किसान को सिर्फ फसल पैदा करने वाला व्यक्ति मानना नहीं है। कोशिश यह
है कि किसान तकनीक, प्रसंस्करण, ब्रांड निर्माण और बाजार से भी सीधे जुड़ सके।
किसान के सम्मान से ग्रामीण पुनरुद्धार तक
जब 2018 में इस उत्सव की शुरुआत हुई थी, तब इसका एक प्रमुख उद्देश्य किसानों के सम्मान
और उनकी उपलब्धियों को सामने लाना था। इसलिए आज भी किसान इस आयोजन के केंद्र में हैं।
2026 के कार्यक्रमों में ग्रामीण संस्कृति, स्थानीय खेल, कृषि उत्पाद, पारंपरिक रीति-रिवाज और
ग्रामीण उपभोग को भी शामिल किया गया है। स्थानीय कृषि उत्पादों की बिक्री और ग्रामीण पर्यटन
को बढ़ावा देने पर भी जोर है। इसका आर्थिक महत्व समझना मुश्किल नहीं है।
मान लीजिए किसी गांव की खास चाय, फल, अनाज, खाद्य सामग्री या हस्तशिल्प को एक मजबूत
स्थानीय ब्रांड मिल जाता है। तब किसान की कमाई सिर्फ कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहती।
उसके साथ प्रसंस्करण, पैकेजिंग, पर्यटन, स्थानीय सेवाएं और छोटे ग्रामीण कारोबार भी जुड़ते हैं।
यही ग्रामीण पुनरुद्धार की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें गांव को सिर्फ खेती की जगह
नहीं, बल्कि रोजगार, कारोबार, संस्कृति और पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश
की जाती है।
हजारों साल पुरानी कृषि सभ्यता और आधुनिक चीन
चीनी किसान फसल उत्सव की एक और खासियत इसकी सांस्कृतिक जड़ें हैं। चीन की हजारों साल
पुरानी कृषि सभ्यता में शरद विषुव का खास महत्व रहा है। चीन के पारंपरिक 24 सौर कालखंडों में से
एक शरद विषुव को इस उत्सव से जोड़ना उसी सांस्कृतिक निरंतरता को दिखाता है। आज उसी
परंपरा के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट खेती भी जुड़ रही है।
एक तरफ पारंपरिक फसल संस्कृति है, तो दूसरी तरफ आधुनिक कृषि तकनीक। एक तरफ गांवों की
स्थानीय पहचान है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा। एक तरफ किसान की मेहनत का उत्सव
है, तो दूसरी तरफ कृषि आधुनिकीकरण की लंबी रणनीति। यही इस उत्सव की असली खासियत है।
23 सितंबर का यह आयोजन इसलिए सिर्फ अच्छी फसल के लिए खुशी मनाने का दिन नहीं होगा।
2026 में ग्रीष्मकालीन अनाज का रिकॉर्ड उत्पादन, प्रति हेक्टेयर बढ़ी पैदावार और स्मार्ट कृषि पर
बढ़ता जोर यह संकेत देता है कि चीन ग्रामीण विकास को अब उत्पादकता, तकनीक, बाजार और
संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
कहानी सिर्फ खेत में खड़ी फसल की नहीं है। कहानी उस बदलाव की है, जिसमें फसल से आगे बढ़कर
किसान, गांव और पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। फसल यहां अंत नहीं
है। यह आधुनिक कृषि और ग्रामीण पुनरुद्धार के एक नए अध्याय की शुरुआत है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक: नीरज बाली)





