7 सितंबर 2026 को भारत में चीनी राजदूत शू फ़ेइहोंग ने द हिंदू में "विश्व को सशक्त बनाने के लिए
ब्रिक्स की 'शक्ति' का उपयोग" शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया।
लेख में कहा गया है कि 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में
आयोजित होने वाला है। चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता के लिए भारत को पूरा समर्थन देता है और सभी
ब्रिक्स सदस्यों एवं साझेदार देशों के साथ मिलकर ब्रिक्स के विस्तार और उच्च-गुणवत्ता वाले विकास
के लिए एक साझा खाका तैयार करने तथा ब्रिक्स की 'शक्ति' से दुनिया को सशक्त बनाने के लिए
तैयार है।
राजदूत ने अंग्रेजी शब्द 'POWER' यानी 'शक्ति' के पांच अक्षरों के जरिए ब्रिक्स के व्यापक सहयोग
को लेकर अपने विचार साझा किए।
पहला है P यानी सिद्धांत (Principle)। लेख में कहा गया है कि विश्व शांति और विकास की
महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में ब्रिक्स को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का दृढ़ता से
पालन करना चाहिए। साथ ही, संप्रभु समानता, आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और विवादों के
शांतिपूर्ण समाधान जैसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों की रक्षा करनी चाहिए। दुनिया को
फिर से ऐसी स्थिति में जाने से रोकना चाहिए, जहां ताकतवर देश कमजोर देशों का शोषण करें।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मानवता के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की परिकल्पना
और चार वैश्विक पहलें सामने रखी हैं। इनमें वैश्विक सुरक्षा पहल और वैश्विक शासन पहल भी
शामिल हैं। ये पहल साझा मानवीय चुनौतियों का समाधान करने और मिलकर एक बेहतर दुनिया
बनाने के लिए चीन के समाधान पेश करती हैं।
दूसरा है O यानी खुलापन (Openness)। लेख में कहा गया है कि हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि
आर्थिक वैश्वीकरण इतिहास की एक अपरिहार्य दिशा है। ब्रिक्स देशों को विश्व व्यापार संगठन
(WTO) को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन करना चाहिए, WTO के
मूलभूत सिद्धांतों, जैसे सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र के व्यवहार की रक्षा करनी चाहिए और संरक्षणवाद
के सभी रूपों का विरोध करना चाहिए। चीन एक खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए
प्रतिबद्ध है, ताकि खुलेपन के जरिए अवसर साझा किए जा सकें और साझा विकास हासिल किया
जा सके।
तीसरा है W यानी पारस्परिक लाभ (Win-Win)। लेख में कहा गया है कि ब्रिक्स को खुलेपन,
समावेशिता और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग की भावना को बनाए रखना चाहिए। ब्रिक्स के एजेंडे
में विकास को प्राथमिकता देते हुए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन में तेजी
लानी चाहिए। साथ ही, संवाद मजबूत करना चाहिए, वर्ष 2030 के बाद के वैश्विक विकास एजेंडे के
निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने पर आम सहमति बनानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि
वैश्विक दक्षिण के देश अंतरराष्ट्रीय सहयोग में समान रूप से भाग लें और विकास के लाभ साझा
करें।
आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए ब्रिक्स देशों को पारस्परिक लाभ और सभी पक्षों के
लिए लाभकारी परिणाम हासिल करने का प्रयास करना चाहिए। व्यापक आर्थिक नीतियों पर ब्रिक्स
देशों के बीच समन्वय मजबूत करना और व्यापार एवं निवेश को आसान बनाने के लिए और अधिक
कदम उठाना जरूरी है।
चौथा बिंदु E यानी इंजन (Engine) है। लेख में कहा गया है कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग
आधी आबादी रहती है। ये देश वैश्विक आर्थिक उत्पादन का करीब 30 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार
का लगभग पांचवां हिस्सा रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान
के अनुसार, 2028 तक ब्रिक्स देशों की विकास दर G7 देशों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक
होगी। इससे विश्व आर्थिक विकास के इंजन के रूप में ब्रिक्स की भूमिका और स्पष्ट होती है।
ब्रिक्स देशों को अपनी-अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए व्यापार, वित्त, विज्ञान और प्रौद्योगिकी
जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करना चाहिए। साथ ही, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट
विनिर्माण और नए औद्योगीकरण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहिए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी,
स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस्तेमाल को सक्रिय
रूप से बढ़ावा देना चाहिए, ताकि विश्व आर्थिक विकास को नई गति मिल सके।
लेख में कहा गया है कि चीन ने चीन-ब्रिक्स AI विकास और सहयोग केंद्र तथा चीन-ब्रिक्स नई
गुणवत्ता उत्पादक शक्ति अनुसंधान केंद्र की स्थापना की है और सभी पक्षों की सक्रिय भागीदारी का
स्वागत करता है।
पांचवां बिंदु R यानी उत्तरदायित्व (Responsibility) है। लेख में कहा गया है कि ब्रिक्स देश
निष्पक्षता और न्याय की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण शक्ति तथा एकता और सहयोग को बढ़ावा देने
वाली रीढ़ हैं। ऐसे में विश्व शांति और विकास को बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। इस
वर्ष और अगले वर्ष भारत और चीन बारी-बारी से ब्रिक्स की अध्यक्षता करेंगे। दोनों देशों के बीच
मजबूत समन्वय बनाए रखना ब्रिक्स सहयोग की निरंतर और स्थिर प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे विकासशील देशों के साझा हितों की बेहतर रक्षा भी सुनिश्चित होगी।
लेख के अंत में राजदूत शू फ़ेइहोंग ने चीन-भारत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष
की शुरुआत से राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन-
भारत संबंधों में सुधार और विकास का रुझान बना हुआ है। दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तरों पर संवाद
मजबूत किया और अलग-अलग क्षेत्रों में आदान-प्रदान एवं सहयोग को बढ़ावा दिया, जिससे
सकारात्मक परिणाम मिले हैं। चीन और भारत के बीच पांच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं और
छह साल के निलंबन के बाद सीमा व्यापार भी दोबारा शुरू हुआ है।
लेख में कहा गया है कि चीन भारत के साथ मिलकर दोनों नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति
को ठोस कदमों में बदलने, एक-दूसरे के सहयोगी और मददगार पड़ोसी बनने तथा चीन-भारत संबंधों
को निरंतर, स्वस्थ और स्थिर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई
दिल्ली में आयोजित होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन सफल होगा और कहा कि अगले वर्ष
चीन में सभी का स्वागत है, ताकि ब्रिक्स की शक्ति से दुनिया को सशक्त बनाने का प्रयास जारी रखा
जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)