उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग समुद्री सुरक्षा और जन-कल्याण के लिए हो: चीन

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू त्सोंग ने 29 अक्तूबर को सुरक्षा परिषद की उभरती
प्रौद्योगिकियां और समुद्री सुरक्षा विषय पर खुली बहस में भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि उभरती प्रौद्योगिकियों का बेहतर इस्तेमाल समुद्री सुरक्षा और
आम लोगों के कल्याण के लिए किया जाए।

फू त्सोंग ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) उपग्रह नक्षत्र और मानवरहित
प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां तेज़ी से विकसित हो रही हैं। समुद्री गतिविधियों को मज़बूत
बनाने, नीली अर्थव्यवस्था के विकास और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने में इनके व्यापक उपयोग की
संभावनाएं हैं। लेकिन इसके साथ ही इन प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग और बढ़ते शासन घाटे ने समुद्री
सुरक्षा के सामने नए जोखिम और चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को
एकजुटता और सहयोग मज़बूत करना चाहिए, विकास और सुरक्षा को समान महत्व देना चाहिए और
इन प्रौद्योगिकियों को समुद्री सुरक्षा तथा जन-कल्याण की बेहतर सेवा में लगाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि सभी देशों को मानव-केंद्रित सोच अपनानी चाहिए। साथ ही समुद्री स्थिति-
जागरूकता, जोखिम चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी
उपकरणों का समग्र रूप से इस्तेमाल करना चाहिए। इससे समुद्री कानून प्रवर्तन, खोज एवं बचाव तथा
आपदा रोकथाम और न्यूनीकरण के कामों में मदद मिलेगी। साथ ही समुद्री डकैती, आतंकवाद,
हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी तथा मानव तस्करी जैसे समुद्री अपराधों से भी ज़्यादा
प्रभावी ढंग से निपटा जा सकेगा।

फू त्सोंग ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कुछ क्षेत्रीय संघर्ष लंबे समय तक खिंचते रहे हैं। इससे
आसपास के समुद्री क्षेत्रों और अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों में तनाव पैदा हुआ है और वैश्विक शिपिंग सुरक्षा
तथा आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों को साझा,
व्यापक, सहयोगात्मक और सतत सुरक्षा की अवधारणा अपनानी चाहिए। साथ ही उन्हें सक्रिय रूप से
बातचीत और परामर्श करना चाहिए, कूटनीतिक तरीकों से विवादों का समाधान निकालना चाहिए और
क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
फू त्सोंग ने आगे कहा कि विकासशील देशों को धन, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में

ज़्यादा सहायता दी जानी चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि उभरती प्रौद्योगिकियों के लाभ सभी देशों की
जनता तक समान रूप से पहुंचने चाहिए और डिजिटल-बुद्धिमान खाई तथा विकास की खाई को पाटा
जाना चाहिए।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

 

 

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