समुद्री सुरक्षा और जन-कल्याण के लिए AI व नई तकनीकों के इस्तेमाल की अपील, संयुक्त राष्ट्र में चीन ने उठाया मुद्दा

29 October 2026, China, Peking: German President Frank-Walter Steinmeier delivers a speech at Peking University after being awarded an honorary professorship. Federal President Frank-Walter Steinmeier is traveling to Anhui Province and Beijing on a six-day state visit. He is accompanied by a delegation from the German Bundestag, the European Parliament, the Federal Government, and representatives from the fields of culture, science, and civil society. Photo by: Katharina Kausche/picture-alliance/dpa/AP Images

चीन के दौरे पर आए जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर श्टाइनमायर ने 29 अक्तूबर की दोपहर पेकिंग
विश्वविद्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने चीन-जर्मन सहयोग पर केंद्रित भाषण दिया। इसके बाद
वह विश्वविद्यालय के व्यायामशाला में गए, जहां उन्होंने टेबल टेनिस खेला और चीनी तथा विदेशी
छात्रों से उत्साह के साथ बातचीत की।

अपने भाषण में श्टाइनमायर ने विभिन्न क्षेत्रों में चीन के तेज़ विकास की जमकर सराहना की।
खासकर नवाचार में उसकी उपलब्धियों को उन्होंने अभूतपूर्व बताया। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा
कि जर्मनी विकास के पथ पर चीन का साझेदार बने रहने के लिए तैयार है।
श्टाइनमायर ने कहा कि यूरोप के लोग चीन के विकास का स्वागत करते हैं। उनके मुताबिक़ दोनों
पक्षों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों का इतिहास साबित करता है कि मुक्त और निष्पक्ष व्यापार
से सभी को फ़ायदा होता है। उन्होंने कहा, हम चीन से संबंध तोड़ना नहीं चाहते और आशा करते हैं
कि व्यापार पारस्परिक लाभ की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी
साझेदारी तभी टिकाऊ हो सकती है, जब वह आपसी लाभ और दोनों पक्षों की जीत वाले सहयोग पर
आधारित हो।

इसके अलावा राष्ट्रपति श्टाइनमायर ने जलवायु परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास से पैदा
हुई नई चुनौतियों समेत कई क्षेत्रों में जर्मन-चीनी सहयोग पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, मेरा
मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुसंधान और विकास में चीन अग्रणी है, और जर्मन कंपनियां
चीन के साथ सहयोग करने को तैयार हैं।

अपने संबोधन में उन्होंने चीन के आनहुई प्रांत में वोक्सवैगन के संयुक्त उद्यम संयंत्र के दौरे का भी
ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां जर्मन और चीनी शोधकर्ता कंप्यूटर पर साथ-साथ काम करते
दिखे। ये शोधकर्ता मिलकर नई कारों के लिए ज़रूरी सॉफ्टवेयर मॉड्यूल विकसित करते हैं, जिनमें
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल भी शामिल है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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