चीन की पहलः एससीओ के जरिए विभिन्न देशों को एकजुट होने का मंच मिला

चीन की पहल पर दो दशक पहले स्थापित शांगहाई सहयोग संगठन(एससीओ) आज एक
बड़ा और प्रभावशाली मंच बन गया है। वर्ष 2001 में एक छोटे से क्षेत्रीय संगठन के रूप में
गठित एससीओ का लगातार विस्तार हो रहा है। इसके जरिए विभिन्न देशों को अपनी
आवाज़ को मजबूती से उठाने का मौका मिलता है, साथ ही दुनिया में हो रहे बदलावों और
चुनौतियों पर एकजुट होकर काम करने की भी प्रेरणा मिलती है। साल 2026 का एससीओ
शिखर सम्मेलन पिछले दिनों किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में सफलता से संपन्न हुआ।
इसमें चीन की अहम भूमिका रही है, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के तौर पर
चीन को तमाम देशों के सम्मुख सम्मान हासिल है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा की
गयी घोषणा और बातों को विश्व में गंभीरता से सुना जाता है। ऐसे में यह संगठन लगातार
मजबूत हो रहा है और वैश्विक मामलों में इसकी भूमिका अहम हो रही है।

वर्तमान सम्मेलन की बात करें तो, इसमें एससीओ के सदस्य देशों ने संगठन के विकास के
अगले चरण को लेकर अच्छी और सार्थक चर्चा की। बताया जाता है कि बिश्केक में 30 से
अधिक सहयोग दस्तावेज तैयार किए गए, जिनमें परिवहन, लॉजिस्टिक्स और
बायोटेक्नोलॉजी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा और ड्रग कंट्रोल आदि शामिल
थे। इस दौरान संगठन के सदस्यों की एकजुटता से भी दुनिया को नया संदेश गया। जिस
तरह से वैश्विक उथल-पुथल चल रही है और युद्ध व संघर्ष जारी हैं, ऐसे में एससीओ का
महत्व और बढ़ गया है। बिश्केक में तैयार दस्तावेजों से पता चलता है कि पिछले साल चीन
के थ्येनचिन में आयोजित हुए सम्मेलन में निर्धारित दस वर्षीय विकास रणनीति को लागू
करने की दिशा में ठोस प्रगति हासिल हो रही है। गौरतलब है कि चीन न केवल एससीओ
का एक संस्थापक सदस्य है, बल्कि इस संगठन के विकास और उसकी दिशा तय करने
वाला अहम योगदानकर्ता भी है।

ध्यान रहे कि इस साल का एससीओ सम्मेलन ऐसे वक्त में हुआ, जब दुनिया उथल-पुथल
और बदलाव के एक नए दौर से गुजर रही है, और ग्लोबल गवर्नेंस एक और अहम मोड़ पर
खड़ा है। इस अवसर पर संगठन के बेहतर गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य
से, चीन ने एससीओ देशों से अपील की कि वे ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी उठाने और मानव
विकास को एक अच्छे भविष्य की ओर ले जाने के लिए आगे आएं।

इतना ही नहीं चीन ने इस संगठन के सदस्यों से विकास को प्राथमिकता देने और पूरे मानव
समाज के लिए खुशहाली का रास्ते खोलने के लिए समर्पित रहने की आवश्यकता पर जोर
देने का आग्रह किया। वहीं सुरक्षा को एक अहम लक्ष्य मानकर और आम सुरक्षा का माहौल

तैयार करने पर ध्यान दिया जाय। जबकि मानव को सर्वोपरि मानते हुए. हमेशा कायम रहने
वाली दोस्ती की नींव मजबूत की जाय। साथ ही बातचीत और सलाह-मशविरे को बढ़ावा देने
की वकालत भी चीन द्वारा की गयी है।

बिश्केक सम्मेलन ने साबित किया है कि एससीओ शांति स्थापना के लिए बना एक मजबूत
स्तंभ है, खुलेपन के लिए एक जिम्मेदार ताकत है, और एक अशांत व चुनौतियों से भरी
दुनिया में स्थिरता लाने की जिम्मेदारी निभा रहा है।

एससीओ के इतिहास पर नजर डालें तो यह वर्ष 2001 में छह देशों के एक समूह के तौर
पर शुरू हुआ, उस समय इसका रोल ज्यादा बड़ा नहीं था। लेकिन 2026 आते-आते एससीओ
27 सदस्यों वाला बड़ा और एक मजबूत संगठन बन गया है। जिसमें लगभग दुनिया की
आधी आबादी को प्रतिनिधित्व मिलता है, साथ ही इसका आर्थिक ढांचा 30 ट्रिलियन डॉलर
का है। इस संगठन के दायरे में राजनीति और सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्थिति भी
शामिल है। इस तरह एससीओ की भूमिका वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रही है, जो आने
वाले समय में भी जारी रहेगी।

(अनिल पांडेय, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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