बीजिंग। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया के कई देशों की तरह चीन भी लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती का सामना कर रहा है। भारी बारिश, बाढ़ और शक्तिशाली तूफानों की बढ़ती घटनाओं ने सरकार को आपदा प्रबंधन की रणनीति को और मजबूत बनाने के लिए प्रेरित किया है। हाल के दिनों में च्यांगशी, हूनान और क्वांगतोंग जैसे प्रांतों में बाढ़ के खतरे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी चुनौती को देखते हुए चीन ने केवल राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक तैयारी पर जोर देते हुए 2026 से 2028 तक का तीन वर्षीय राष्ट्रीय एक्शन प्लान जारी किया है। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करना और समय रहते सटीक चेतावनी प्रणाली विकसित करना है।
2026-28 तक बाढ़ और बारिश पर विशेष फोकस
सैटेलाइट, रडार और एआई आधारित निगरानी होगी मजबूत
तीन-स्तरीय चेतावनी प्रणाली से समय पर अलर्ट
हाइड्रोलॉजी नेटवर्क और वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा
जलवायु संकट से निपटने की दीर्घकालिक तैयारी शुरू
चीन के जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी इस व्यापक कार्ययोजना में आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल निगरानी को आपदा प्रबंधन का आधार बनाया गया है। सरकार का मानना है कि केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना अधिक आवश्यक है जो संभावित खतरे का पहले से पता लगाकर लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सके।
नई योजना के तहत सबसे अधिक जोर बारिश और बाढ़ की निगरानी, पूर्वानुमान और समयपूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने पर दिया गया है। इसके लिए देशभर में आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल नेटवर्क विकसित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि मौसम, वर्षा और नदियों के जलस्तर से जुड़े आंकड़े वास्तविक समय (रीयल टाइम) में उपलब्ध हों, जिससे किसी भी संभावित बाढ़ या जलभराव की स्थिति का पहले ही आकलन किया जा सके।
इस कार्ययोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तीन-स्तरीय बारिश और बाढ़ निगरानी प्रणाली है। यह प्रणाली तीन अलग-अलग स्तरों पर जानकारी जुटाकर अधिक सटीक पूर्वानुमान तैयार करेगी। पहले स्तर पर सैटेलाइट और मौसम रडार वातावरण में बनने वाले बादलों और वर्षा प्रणाली पर नजर रखेंगे। दूसरे स्तर पर रेन गेज नेटवर्क जमीन पर वास्तविक वर्षा की मात्रा दर्ज करेगा। तीसरे स्तर पर हाइड्रोलॉजिकल स्टेशन नदियों के जलस्तर, जलप्रवाह और जलाशयों की स्थिति की लगातार निगरानी करेंगे। इन तीनों स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का समन्वित विश्लेषण कर समय रहते चेतावनी जारी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बहु-स्तरीय प्रणाली केवल मौसम का पूर्वानुमान देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाढ़ के संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों की पहचान, निकासी योजना और राहत कार्यों की तैयारी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रशासन को आपदा आने से पहले आवश्यक कदम उठाने का अवसर मिलेगा।
कार्ययोजना में राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजिकल स्टेशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर भी विशेष बल दिया गया है। सरकार का लक्ष्य देशभर में जल संसाधनों की निगरानी, विश्लेषण और मूल्यांकन की क्षमता बढ़ाना है। इसके अलावा जल गुणवत्ता, जल उपलब्धता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) की निगरानी के लिए भी नई तकनीकों को अपनाया जाएगा।
चीन ने इस योजना में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को भी प्रमुख स्थान दिया है। हाइड्रोलॉजी के क्षेत्र में नई तकनीकों, स्मार्ट डेटा विश्लेषण, डिजिटल मॉडलिंग और आधुनिक उपकरणों के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), बिग डेटा और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकें भविष्य में आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
सरकार ने वर्ष 2028 तक इस तीन-स्तरीय निगरानी और पूर्वानुमान प्रणाली का विस्तार उन सभी प्रमुख नदी बेसिनों तक करने का लक्ष्य रखा है, जहां बाढ़ का खतरा अधिक रहता है। इससे यांग्त्ज़ी, पर्ल और अन्य महत्वपूर्ण नदी क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
हाल के वर्षों में चीन में जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पारंपरिक आपदा प्रबंधन पर्याप्त नहीं है। आधुनिक तकनीक, डेटा आधारित निर्णय और मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली ही भविष्य में जनहानि और आर्थिक नुकसान को कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। एशिया, यूरोप और अमेरिका सहित कई देशों में रिकॉर्ड बारिश, बाढ़ और भीषण मौसम की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे समय में चीन का यह तीन वर्षीय एक्शन प्लान केवल घरेलू आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) की व्यापक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह योजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार लागू होती है तो चीन की बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली पहले से अधिक सटीक और प्रभावी बन सकती है। इससे आपदा आने से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत एजेंसियों की तैनाती और प्रशासनिक तैयारियों में काफी सुधार होगा। साथ ही जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी।
प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौती के बीच चीन का यह कदम इस बात का संकेत है कि भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीति केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और समयपूर्व चेतावनी व्यवस्था के माध्यम से जोखिम को पहले ही कम करने पर केंद्रित होगी। यही मॉडल आने वाले समय में अन्य देशों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





