जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर चीन ने जताई कड़ी आपत्ति… “चीनी खतरे” को बढ़ा चढ़ाकर किया पेश

Japan defense white paper

जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर चीन ने जताई कड़ी आपत्ति
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने बुधवार को जापान सरकार द्वारा जारी 2026 के रक्षा श्वेत पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस दस्तावेज में एक बार फिर चीन के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें तथाकथित “चीनी खतरे” को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है, थाईवान मुद्दे में हस्तक्षेप किया गया है और चीन के आंतरिक मामलों में दखल दिया गया है। चीन ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए जापान के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
एक पत्रकार के सवाल के जवाब में, जिसमें जापान ने चीन को “सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती” बताया था, लिन च्येन ने कहा कि चीन हमेशा शांतिपूर्ण विकास के रास्ते पर चलता है और उसकी सैन्य नीति पूरी तरह रक्षात्मक है। उन्होंने कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियां वैध और उचित हैं। उन्होंने दोहराया कि थाईवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और यह पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है, इसलिए जापान को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि त्याओयू द्वीप और उससे जुड़े अन्य द्वीप प्राचीन काल से चीन के अभिन्न हिस्से रहे हैं और जापान इस ऐतिहासिक तथ्य को बदल नहीं सकता।
इसके साथ ही लिन च्येन ने कहा कि जापानी सैन्यवाद ने अतीत में एशिया और दुनिया को भारी नुकसान पहुंचाया था, लेकिन जापान ने अब तक इतिहास से जरूरी सबक नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जापान तेजी से पुन: सैन्यीकरण की दिशा में बढ़ रहा है, संविधान और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की भावना के विपरीत कदम उठा रहा है और युद्ध के बाद बनी अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। उनके अनुसार, यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने जापान से इतिहास पर गंभीरता से आत्ममंथन करने, सैन्य विस्तार के लिए बहाने बनाना बंद करने और गलत दिशा में आगे बढ़ने से बचने की अपील की।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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