करीब 90 साल पहले चीन के युवाओं के एक समूह ने बेहद कठिन परिस्थितियों में लंबी यात्रा शुरू की थी। उनकी औसत उम्र 25 वर्ष से भी कम बताई गई है। पैरों में घास की चप्पलें, सामने बर्फीले पहाड़ और घास के मैदान और हजारों मील लंबी कठिन राह के बावजूद उनके भीतर एक मजबूत विश्वास था। इसी संघर्ष और संकल्प से आगे चलकर “महान लंबी मार्च की भावना” की पहचान बनी। इस विचार की जड़ें 1921 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के समय तय किए गए उन लक्ष्यों से जोड़ी गई हैं, जिनमें चीनी जनता के बेहतर जीवन और राष्ट्र के हित को प्राथमिकता देना शामिल था।
1921 से शुरू हुई विचारधारा को चीन ने अलग-अलग दौर में आगे बढ़ाया
2021 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर शी चिनफिंग ने “चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की आध्यात्मिक विरासत” की अवधारणा को विस्तार से सामने रखा। इसके अनुसार यह अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी भावनाओं का केवल संग्रह नहीं है, बल्कि पार्टी के एक सदी लंबे सफर से विकसित हुई लगातार चलने वाली विचारधारा है। इसका शुरुआती आधार पार्टी स्थापना की भावना और जनता के बेहतर जीवन तथा चीनी राष्ट्र के पुनरुत्थान के लक्ष्य से जुड़ा बताया गया है।
लंबी मार्च से यानआन तक संघर्ष की अलग-अलग भावनाओं ने बनाई विरासत
क्रांतिकारी दौर में लंबी मार्च की भावना के साथ चिंगकांगशान और यानआन की भावना भी विकसित हुई। इस दौर के संघर्षों को पार्टी के नेतृत्व में नए चीन की स्थापना से जोड़ा गया है। इसके बाद देश निर्माण के समय कठिन वैज्ञानिक और तकनीकी परिस्थितियों के बीच शोधकर्ताओं के प्रयासों से “दो बम, एक उपग्रह” की भावना सामने आई। इसी तरह च्याओ यूलू ने बीमारी के बावजूद रेत रोकने और पेड़ लगाने के अभियान में नेतृत्व किया, जिसे “च्याओ यूलू भावना” के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सुधार और खुलेपन के दौर में नई चुनौतियों के साथ जुड़ी नई भावनाएं
सुधार और खुलेपन के दौर में विशेष आर्थिक क्षेत्र, बाढ़ नियंत्रण और मानवयुक्त अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी भावनाओं को इस विरासत का हिस्सा बताया गया। इन प्रयासों को चीन के आर्थिक विकास और तकनीकी क्षमता बढ़ाने से जोड़ा गया है। इसके बाद नए दौर में गरीबी उन्मूलन, वैज्ञानिक और सिल्क रोड जैसी भावनाओं ने इस विचारधारा को आगे विस्तार दिया। इनका उद्देश्य चीन की आधुनिकीकरण यात्रा को नई ऊर्जा देना बताया गया है।
जनता को सर्वोपरि रखने का विचार इस पूरी विरासत के केंद्र में
इस आध्यात्मिक विरासत का एक प्रमुख आधार “जनता सर्वोपरि” बताया गया है। इसका इस्तेमाल पार्टी के सदस्यों में जिम्मेदारी और कर्तव्य की भावना मजबूत करने के साथ भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ चेतना पैदा करने के रूप में भी किया जाता है। दूसरी तरफ इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया गया है। गरीबी उन्मूलन, वैज्ञानिक शोध और बड़े राष्ट्रीय अभियानों में लंबे समय तक काम करने वाले लोगों के प्रयासों को इसी भावना से जोड़ा गया है।
लंबी मार्च के दौरान ग्रामीणों की मदद करने से लेकर गरीबी उन्मूलन के दौरान किसी व्यक्ति को पीछे नहीं छोड़ने के संकल्प तक, जनता के जीवन को बेहतर बनाने का विचार इस पूरी विरासत के केंद्र में बताया गया है। पुराने आवासीय क्षेत्रों का सुधार और स्वास्थ्य बीमा के विस्तार जैसे प्रयासों को भी इसी सोच से जोड़कर देखा गया है।
“हर पीढ़ी की अपनी लंबी मार्च”, नई चुनौतियों के लिए पुरानी भावना का सहारा
शी चिनफिंग के अनुसार, “हर पीढ़ी की अपनी लंबी मार्च होती है।” आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब सामने बर्फीले पहाड़ों और युद्ध जैसी वही चुनौतियां नहीं हैं, लेकिन विकास, लोगों की आजीविका और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
ऐसे में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की यह आध्यात्मिक विरासत उसके समर्थकों के अनुसार पिछली एक सदी के संघर्ष और अनुभव से मिली ऊर्जा का स्रोत है। इसे नई चुनौतियों से निपटने और चीन की आधुनिकीकरण यात्रा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।





