चीन-भारत को साझेदार बनना चाहिए: चीनी विदेश मंत्रालय

China and India should become partners Chinese Foreign Ministry

चीन-भारत को साझेदार बनना चाहिए: चीनी विदेश मंत्रालय

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने सोमवार को पेइचिंग में आयोजित एक नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच लगातार तीसरे वर्ष सफल बैठक हुई है। इन बैठकों में सबसे महत्वपूर्ण सहमति यह रही है कि चीन और भारत को साझेदार बनना चाहिए।
एक पत्रकार के सवाल के जवाब में क्वो च्याखुन ने बताया कि 12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स नेताओं के 18वें शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह दोनों नेताओं के बीच लगातार तीसरे वर्ष हुई वार्षिक बैठक थी। क्वो ने कहा कि मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि चीन और भारत की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे की कमियों को पूरा कर सकते हैं, एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, एक-दूसरे की सफलता में योगदान दे सकते हैं और साथ मिलकर विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रणनीतिक समझ के
आधार पर सही दिशा तय करनी चाहिए। साथ ही, सहयोग और पारस्परिक लाभ की भावना के साथ एक-दूसरे की सफलता में योगदान देना चाहिए, आपसी सम्मान और समझ के साथ बाधाओं को दूर करना चाहिए तथा खुले और समावेशी बहुपक्षीय सहयोग के जरिए दुनिया के हित में काम करना चाहिए।
क्वो च्याखुन के अनुसार, मुलाकात के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत स्वतंत्र और स्वायत्त विदेश नीति का पालन करता है और चीन के साथ संबंधों का विकास किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी भी  शक्ति को अपने क्षेत्र में चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देगा। क्वो ने कहा कि चीन प्रधानमंत्री मोदी के इस महत्वपूर्ण बयान को काफी महत्व देता है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि चीन और भारत दुनिया
के दो सबसे अधिक जनसंख्या वाले देशों और वैश्विक दक्षिण के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में विकास पर ध्यान केंद्रित करें। इसके साथ ही, मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को मजबूत करें, द्विपक्षीय संबंधों के लिए जनमत के आधार को बेहतर बनाएं और आर्थिक एवं व्यापारिक चिंताओं का संतुलित समाधान करें। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन करने, वैश्विक दक्षिण के बीच सहयोग को बढ़ावा देने, विश्व के बहुध्रुवीकरण को आगे बढ़ाने और अस्थिर दुनिया में स्थिरता एवं प्रगति की शक्ति बनने पर भी  सहमति जताई। (साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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