एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की झलक: काशी में गूंजा
योगी बोले—यह मंचन इतिहास को जीवंत करने वाला यादगार क्षण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य को एक ऐतिहासिक और यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करता है, जहां वाराणसी की धरती को उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा गया।
काशी और महाकाल की परंपरा का संगम
मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर भारतीय संस्कृति के दो महान केंद्र हैं, जिनका यह संगम देश की एकता और परंपरा को मजबूत करता है। उन्होंने इसे प्रेम, सहयोग और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बताया।
सम्राट विक्रमादित्य: न्याय और नीति के प्रतीक
योगी आदित्यनाथ ने सम्राट विक्रमादित्य को नीति, न्याय और आदर्श शासन का प्रतीक बताया। उन्होंने राजा भर्तृहरि के साथ उनकी जोड़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा भारतीय इतिहास में भाईचारे और त्याग का उदाहरण है। साथ ही उन्होंने अयोध्या के प्राचीन इतिहास से भी विक्रमादित्य का संबंध बताया।
मोदी के नेतृत्व में बढ़ता भारत का गौरव
उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 2014 के बाद भारत ने विकास, संस्कृति और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है। योग और आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता इसका प्रमाण है। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2024 का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी भारत की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती है।
भव्य मंचन ने दर्शकों को पहुंचाया स्वर्णिम युग में
‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का मंचन दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव साबित हुआ।
- 400 से अधिक कलाकारों ने जीवंत अभिनय से इतिहास को साकार किया
- हाथी, घोड़े, रथ और भव्य सेट ने युद्ध और राजसी वैभव को वास्तविक बना दिया
- ‘सिंहासन बत्तीसी’ और विक्रम संवत जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को भावुक और गौरवान्वित किया
रोमांच और भावनाओं का संगम
जब सम्राट विक्रमादित्य वेश बदलकर प्रजा का हाल जानने निकलते हैं, वह दृश्य दर्शकों के दिल को छू गया। वहीं युद्ध के दृश्य, प्रकाश और संगीत के प्रभाव ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया।
गूंजे जयकारे, बना ऐतिहासिक माहौल
तीन दिवसीय इस आयोजन की पहली ही शाम में भारी भीड़ उमड़ी। चरम दृश्य पर “जय महाकाल” और “सम्राट विक्रमादित्य” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। अंतिम दृश्य में राज्याभिषेक और पुष्पवर्षा ने हर दर्शक को गर्व से भर दिया। यह महानाट्य केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक एकता और सुशासन की परंपरा का जीवंत उत्सव बन गया। काशी की यह ऐतिहासिक प्रस्तुति आने वाले समय में सांस्कृतिक विरासत का मजबूत स्तंभ साबित होगी।