सिंहस्थ से पहले जमीन का खेल? उज्जैन मास्टर प्लान के बीच 168 एकड़ जमीन की खरीदी पर घिरे मुख्यमंत्री…कांग्रेस ने मांगा जवाब

Chief Minister Mohan Yadav

महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीन खरीद का मामला गरमा गया है। The Indian Express की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और उनके परिवार
सदस्यों द्वारा उज्जैन में बड़े पैमाने पर की गई भूमि खरीद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जिन क्षेत्रों में भविष्य में सड़क, हाईवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकसित होनी हैं, उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री के परिवार ने बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है।

जानें मुख्यमंत्री बनने के बाद कैसे बने जमींदार डॉ.मोहन यादव
नए सड़क प्रोजेक्ट के बीच 168 एकड़ जमीन खरीद का दावा
मुख्यमंत्री और उनके परिवार की रियल एस्टेट कंपनियों ने खरीदी जमीन

 

उज्जैन भूमि खरीद: रिपोर्ट में उल्लेखित प्रमुख आंकड़े

अवधि                                 प्लॉटों की संख्या भूमि (एकड़)                              विवरण
2021-2023 (शिक्षा मंत्री कार्यकाल) 85 एकड़+ परिवार द्वारा खरीदी गई भूमि का हिस्सा
दिसंबर 2023 से पहले कुल होल्डिंग 108 प्लॉट 179 एकड़ परिवार के पास पहले से मौजूद भूमि
13 दिसंबर 2023 – दिसंबर 2025 137 प्लॉट 168 एकड़ मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई भूमि
इनमें आंतरिक हस्तांतरण – 12 एकड़ परिवार के भीतर ट्रांसफर
कुल होल्डिंग (रिपोर्ट के अनुसार) 245 प्लॉट 347 एकड़* पुरानी और नई खरीद का संयुक्त आंकड़ा
कांग्रेस के आरोप अनुसार 253 प्लॉट 335 एकड़ सार्वजनिक बयान में दावा किया गया आंकड़ा
अनुमानित निवेश – – लगभग ₹45 करोड़

प्रमुख टाइमलाइन

वर्ष/तारीख घटनाक्रम
मई 2023 उज्जैन मास्टर प्लान-2035 जारी
13 दिसंबर 2023 डॉ.मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
जनवरी 2024 नई सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की घोषणाएं
दिसंबर 2023 – दिसंबर 2025 137 प्लॉट और 168 एकड़ भूमि खरीद का दावा
जून 2026 रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने स्पष्टीकरण मांगा

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से डॉ.मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने करीब 137 प्लॉट, यानी लगभग 168 एकड़ जमीन खरीदी है। इन खरीदों पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। बताया गया है कि अधिकांश जमीनें उन इलाकों में स्थित हैं, जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान-2035 और सिंहस्थ से जुड़ी विकास परियोजनाओं से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस पूरे मामले को नैतिकता और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से सफाई देने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है तो सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर सभी तथ्यों को जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन क्षेत्रों में प्रस्तावित परियोजनाओं की जानकारी पहले से होने के कारण भूमि निवेश किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले भी डॉ.मोहन यादव परिवार के पास उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में भूमि मौजूद थी। वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद भूमि खरीद की रफ्तार तेज होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव या राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे संभावित हितों के टकराव और नैतिक जवाबदेही का मुद्दा बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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