मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार करने जा रही है। 13 सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगर मालवा से योजना की 40वीं नियमित मासिक किस्त का अंतरण करेंगे। इस बार प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में करीब 1,835 करोड़ रुपये सीधे पहुंचेंगे।
यह सिर्फ एक सरकारी योजना की अगली किस्त नहीं है। तीन साल से ज्यादा समय में लगातार होने वाला यह आर्थिक अंतरण मध्यप्रदेश की महिला-केंद्रित कल्याण नीति की बड़ी तस्वीर भी सामने रखता है। जून 2023 में जब योजना शुरू हुई थी, तब पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये दिए जाते थे। अक्टूबर 2023 में राशि बढ़ाकर 1,250 रुपये की गई। नवंबर 2025 से इसमें एक बार फिर 250 रुपये की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह मिल रहे हैं। अब 40वीं किस्त के साथ योजना के तहत नियमित मासिक सहायता के रूप में अंतरित कुल राशि 65,395 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगी।
40 किस्तें और बढ़ता भरोसा
किसी भी सामाजिक कल्याण योजना की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि उसका लगातार क्रियान्वयन होता है। लाड़ली बहना योजना की 40वीं नियमित किस्त इसी निरंतरता को रेखांकित करती है। जून 2023 से अगस्त 2026 तक 39 नियमित मासिक किस्तों का भुगतान किया जा चुका है। अब सितंबर की किस्त के साथ यह संख्या 40 हो जाएगी। इसके अलावा रक्षाबंधन के अवसर पर अगस्त 2023, अगस्त 2024, अगस्त 2025 और अगस्त 2026 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की विशेष आर्थिक सहायता भी दी गई। यानी योजना का दायरा केवल नियमित मासिक सहायता तक सीमित नहीं रहा है। अलग-अलग अवसरों पर अतिरिक्त आर्थिक सहयोग के जरिए भी महिला हितग्राहियों को राहत देने की कोशिश की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। इससे लाभार्थी महिला के हाथ में आर्थिक सहायता सीधे पहुंचती है और उसके उपयोग को लेकर उसका अपना निर्णय महत्वपूर्ण हो जाता है।
1,500 रुपये की राशि का मतलब क्या?
किसी महिला के लिए 1,500 रुपये हर महीने शाय द बहुत बड़ी रकम न लगें, लेकिन नियमित और सीधे मिलने वाली राशि का अपना महत्व है। घर के छोटे खर्च। बच्चों की जरूरतें। दवाइयां। पढ़ाई से जुड़े खर्च। दैनिक जरूरत का सामान। या फिर छोटी बचत। इन खर्चों में महिला के पास अपना पैसा होना उसके आर्थिक निर्णयों में उसकी भूमिका को मजबूत कर सकता है। यही इस योजना का व्यापक सामाजिक पक्ष है। महिला सशक्तिकरण केवल रोजगार या बड़े व्यवसाय तक सीमित नहीं है। आर्थिक निर्णयों में भागीदारी और अपनी जरूरतों के लिए स्वतंत्र संसाधन होना भी सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लिहाज से लाड़ली बहना योजना का असर सिर्फ बैंक खाते तक नहीं, परिवार के भीतर महिला की आर्थिक भूमिका तक भी पहुंच सकता है।
65 हजार करोड़ से ज्यादा का अंतरण
लाड़ली बहना योजना का आकार अब हजारों करोड़ रुपये से आगे बढ़कर 65 हजार करोड़ रुपये से अधिक के संचयी अंतरण तक पहुंच चुका है। जून 2023 से अगस्त 2026 तक योजना के अंतर्गत 63,560.90 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। सितंबर की किस्त के बाद नियमित मासिक सहायता का कुल अंतरण 65,395.99 करोड़ रुपये हो जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश के सामाजिक कल्याण बजट और महिला-केंद्रित नीतियों का एक बड़ा हिस्सा बन चुकी है।
पेंशन पाने वाली महिलाओं के लिए भी प्रावधान
योजना की एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था उन पात्र महिलाओं से जुड़ी है, जिन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत प्रतिमाह 900 रुपये मिल रहे हैं। ऐसी पात्र महिलाओं को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अंतर की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बीच सहायता के स्तर में मौजूद अंतर को कम करना है। यानी सरकार की कोशिश यह है कि पात्र महिला किसी दूसरी सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ ले रही हो, तब भी निर्धारित पात्रता के अनुसार उसे लाड़ली बहना योजना का लाभ मिल सके।
आगर मालवा से महिला शक्ति का संदेश
13 सितंबर का कार्यक्रम सिर्फ लाड़ली बहना योजना की किस्त तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगर मालवा में 225.95 करोड़ रुपये के 33 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 28.14 करोड़ रुपये के 17 कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। यानी एक ही कार्यक्रम में महिला कल्याण और विकास कार्यों की दो तस्वीरें दिखाई देंगी। एक तरफ करोड़ों रुपये सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचेंगे। दूसरी तरफ करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की शुरुआत और लोकार्पण होगा। इसे सरकार की उस नीति के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत विकास को समानांतर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
कल्याण से आत्मनिर्भरता तक की अगली चुनौती
हालांकि लाड़ली बहना योजना का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि नियमित आर्थिक सहायता को महिलाओं की दीर्घकालिक आर्थिक ताकत में कैसे बदला जाए। मासिक सहायता तत्काल राहत दे सकती है। लेकिन स्थायी आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए रोजगार, कौशल विकास, छोटे कारोबार, स्वरोजगार, बैंकिंग पहुंच और बाजार से जुड़ाव भी जरूरी है। अगर महिला को हर महीने मिलने वाली राशि का कुछ हिस्सा बचत या आय बढ़ाने वाली गतिविधि में लगाने का अवसर मिले, तो कल्याणकारी सहायता आगे चलकर आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन सकती है। यही वह अगला चरण है, जहां लाड़ली बहना जैसी योजना का प्रभाव और व्यापक हो सकता है। क्योंकि महिला को पैसा देना पहला कदम है। महिला को अपने आर्थिक फैसले लेने में सक्षम बनाना उससे बड़ा कदम है। और महिला को स्थायी आय का साधन उपलब्ध कराना सशक्तिकरण की सबसे मजबूत मंजिल हो सकती है।
40वीं किस्त से आगे की तस्वीर
13 सितंबर को जब 1 करोड़ 25 लाख से ज्यादा महिलाओं के खातों में 1,835 करोड़ रुपये पहुंचेंगे, तो यह मध्यप्रदेश में महिला-केंद्रित कल्याण नीति के लगातार विस्तार का एक और पड़ाव होगा। 40 नियमित किस्तों की यात्रा अपने आप में योजना के व्यापक प्रभाव और निरंतरता को दिखाती है। लेकिन असली सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने रुपये महिलाओं के खातों में पहुंचे। असली सफलता तब होगी, जब इन रुपयों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। परिवार में उनका निर्णय लेने का अधिकार बढ़े। उनकी बचत बढ़े। और वे धीरे-धीरे सहायता पाने वाली हितग्राही से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिला की भूमिका में आगे बढ़ें। लाड़ली बहना की 40वीं किस्त इसलिए सिर्फ 1,835 करोड़ रुपये का अंतरण नहीं है। यह उस सोच का हिस्सा है, जिसमें महिला को परिवार की जरूरतों का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बनाने की कोशिश दिखाई देती है। और अब अगला सवाल यही है। 40 किस्तों का भरोसा। क्या अब यही भरोसा महिला आत्मनिर्भरता की नई ताकत बनेगा? (प्रकाश कुमार पांडेय)





