दीपावली का उत्सव पांच दिनों तक मनाया जाता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। दीपावली से ठीक पहले छोटी दिवाली का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे नरक चतुर्दशी, नरक चौदस, रूप चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन इस बार छोटी दिवाली की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है। सवाल है कि छोटी दिवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी या 8 नवंबर को?
पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि और धार्मिक परंपराओं के आधार पर छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी 7 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
छोटी दिवाली 2026 : स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी के दिन अभ्यंग स्नान यानी शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और व्यक्ति को आरोग्य तथा सौंदर्य का आशीर्वाद मिलता है।
उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार:
| धार्मिक अनुष्ठान | शुभ समय |
|---|---|
| चतुर्दशी तिथि प्रारंभ | 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे |
| चतुर्दशी तिथि समाप्त | 8 नवंबर, सुबह 11:47 बजे |
| अभ्यंग स्नान | 8 नवंबर, सुबह 5:41 से 6:38 बजे |
| चंद्रोदय | शाम 5:41 बजे |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 5:31 से 5:57 बजे |
| सायंकालीन संध्या | शाम 5:31 से 6:50 बजे |
नोट: स्नान और पूजा के समय में स्थानीय पंचांग तथा शहर के अनुसार अंतर संभव है। अभ्यंग स्नान का दिया गया समय 8 नवंबर का है, जबकि छोटी दिवाली का पर्व 7 नवंबर को बताया गया है। इसलिए स्थानीय पंचांग से इसकी पुष्टि अवश्य करें।
क्यों मनाई जाती है छोटी दिवाली?
छोटी दिवाली के पीछे भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर से जुड़ी पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, नरकासुर नामक अत्याचारी राक्षस ने अपनी शक्ति के बल पर 16 हजार स्त्रियों को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचार से देवता, ऋषि-मुनि और आम लोग परेशान थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर उसके आतंक का अंत किया और बंदी बनाई गई स्त्रियों को मुक्त कराया। नरकासुर के अंत और बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में लोगों ने दीप जलाए। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।
यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा
छोटी दिवाली पर यमराज के नाम से दीपदान करने का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से दीपदान करने पर परिवार में सुख-समृद्धि और मंगल की कामना पूरी होती है।
रूप चतुर्दशी पर क्यों किया जाता है अभ्यंग स्नान?
छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे सौंदर्य, आरोग्य और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, यमराज के नाम दीपदान और घर में दीप जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
छोटी दिवाली का धार्मिक संदेश
छोटी दिवाली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय, अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक है। नरकासुर वध की कथा हमें यह संदेश देती है कि अत्याचार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। इस तरह 7 नवंबर को छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। दीपदान, भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और यमराज के निमित्त दीप जलाने के साथ दीपावली के महापर्व की खुशियां और गहरी हो जाएंगी।





