छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध का बड़ा खुलासा, ‘म्यूल अकाउंट सिंडिकेट’ का भंडाफोड़

cyber crime

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। तारबहार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो लोगों के बैंक खाते और ATM कमीशन पर लेकर साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने का काम कर रहा था। पुलिस ने इसे साइबर अपराध का “स्लीपर सेल” बताया है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और अब उसके मोबाइल डेटा के जरिए देशभर में फैले नेटवर्क की जांच की जा रही है।

बिलासपुर की तारबहार पुलिस को सूचना मिली थी कि स्टेट बैंक व्यापार विहार के आसपास कुछ लोग युवाओं और जरूरतमंद लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते और ATM हासिल कर रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय दीपेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। आरोपी सूरजपुर जिले के ग्राम सिरसी का रहने वाला है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करता था। आरोपी के मोबाइल फोन से कई बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी जानकारी भी बरामद हुई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक “म्यूल अकाउंट” साइबर अपराधियों के लिए स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। साइबर ठग सीधे अपने खातों का उपयोग नहीं करते, बल्कि दूसरे लोगों के खाते लेकर उनमें ठगी की रकम ट्रांसफर करते हैं ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके।

अब पुलिस मोबाइल डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन और संपर्कों के जरिए इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह के तार देशभर में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, ATM कार्ड या बैंकिंग जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसा करना कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिलासपुर CSP कोतवाली गगन कुमार की माने तो “म्यूल अकाउंट के माध्यम से साइबर ठगी की रकम को दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जा रहा था। इस मामले में आरोपी को तत्काल गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के मोबाइल डेटा की जांच साइबर पुलिस की टीम कर रही है। सीएसपी ने लोगों से यह अपील है कि लोग अपना बैंक खाता अथवा ATM किसी भी व्यक्ति को कमीशन पर न दें, यह अपराध की श्रेणी में आता है।

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