केमिस्ट्री प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट तक… कौन हैं चंपत राय, जिनका सफर दान विवाद में आकर थमा?

Champat Rai

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रारंभिक जांच के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और इसके कुछ ही घंटों बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपना पद छोड़ दिया। दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे चंपत राय का यह राजनीतिक और सामाजिक सफर अब नए सवालों के बीच चर्चा में है।

  • दान विवाद के बाद ट्रस्ट से इस्तीफा
  • राम मंदिर आंदोलन का प्रमुख चेहरा
  • इमरजेंसी में 18 महीने रहे जेल
  • कोर्ट की लड़ाई के अहम रणनीतिकार
  • आंदोलन से मंदिर निर्माण तक निभाई बड़ी भूमिका

प्रोफेसर से प्रचारक बनने तक का सफर

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना में 18 नवंबर 1946 को जन्मे चंपत राय पढ़ाई में मेधावी थे। उन्होंने फिजिक्स और केमिस्ट्री में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और धामपुर के एक डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बने। लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने शिक्षण सेवा छोड़ दी और पूर्णकालिक प्रचारक का जीवन अपनाया। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प भी लिया।

इमरजेंसी में जेल, फिर आंदोलन की राह

1975 में आपातकाल लागू होने के दौरान संघ से जुड़े होने के कारण चंपत राय को गिरफ्तार किया गया। करीब 18 महीने जेल में रहने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में पूरी तरह संगठनात्मक कार्यों को समर्पित कर दिया। इसके बाद वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े और धीरे-धीरे राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हो गए।

राम जन्मभूमि आंदोलन का मजबूत चेहरा

1989-90 के दौरान जब राम मंदिर आंदोलन तेज हुआ तो उन्हें अवध क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत किया और मंदिर पक्ष के लिए ऐतिहासिक, राजस्व और कानूनी दस्तावेज जुटाने में अहम भूमिका निभाई। अयोध्या से जुड़े रिकॉर्ड और जमीन के दस्तावेजों पर उनकी गहरी पकड़ के कारण उन्हें कई लोग “अयोध्या का चलता-फिरता रिकॉर्ड” भी कहते थे।

विवादित ढांचा विध्वंस केस में भी रहे आरोपी

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में चंपत राय भी आरोपियों में शामिल थे। हालांकि लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2020 में अदालत ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

राम मंदिर ट्रस्ट में मिली अहम जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद 2020 में बने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक में चंपत राय को सर्वसम्मति से महासचिव बनाया गया। मंदिर निर्माण की निगरानी, दान प्रबंधन, निर्माण सामग्री, कारीगरों के समन्वय और ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों में उनकी प्रमुख भूमिका रही। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तक पूरे निर्माण अभियान में वे केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।

अब दान विवाद से घिरे

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बाद यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। जांच एजेंसियों ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। इसी घटनाक्रम के बीच चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि जांच प्रक्रिया जारी है और संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे

चंपत राय का जीवन एक केमिस्ट्री प्रोफेसर से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार और फिर राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पद तक पहुंचने की कहानी रहा है। लेकिन अब दान विवाद ने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि यह विवाद उनके सार्वजनिक जीवन की अंतिम पहचान बनता है या नहीं।

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