आत्मदाह का नाटक चीन की राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता की समग्र स्थिति को नहीं हिला सकता

China national unity and social stability

आत्मदाह का नाटक चीन की राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता की समग्र स्थिति को नहीं हिला सकता

हाल ही में, “तिब्बती स्वतंत्रता” समर्थक ताकतों ने 2 जुलाई को तिब्बती लोग लोका रांगचेंग द्वारा आत्मदाह की घटना का फायदा उठाकर एक तथाकथित “वैश्विक अभियान” शुरू करने, झूठी जनमत गढ़ने, अलगाववादी भावनाओं को भड़काने और चीन को बदनाम करने और विभाजित करने का प्रयास किया है। यह सुनियोजित राजनीतिक तमाशा धार्मिक सिद्धांतों की अवहेलना करता है, ऐतिहासिक तथ्यों का खंडन करता है और कानून एवं न्याय के शासन को कुचलता है। इससे दलाई गुट की भयावह प्रकृति पूरी तरह उजागर हो जाती है, जो मानव की जान और विवेक की अवहेलना करते हुए चीन को विभाजित करने का प्रयास करता है। उनकी यह नासमझी भरी योजना पूर्णतः विफल होने वाली है।
आत्मदाह की इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार दलाई गुट है, जो लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों में लिप्त रहा है। जान को महत्व देना और जीवन की रक्षा करना तिब्बती बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांत हैं। और हत्या न करना बौद्ध धर्म का एक मूलभूत सिद्धांत है। इतिहास भर में, प्रख्यात तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने लगातार इस सिद्धांत को कायम रखा है और जीवन को नुकसान पहुंचाने वाले चरम कृत्यों को कभी भी माफ नहीं किया है। बौद्ध धर्म के सिद्धांतों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आत्महत्या करना या दूसरों को आत्महत्या करने के लिए उकसाना एक गंभीर अपराध है। हालांकि, अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए, दलाई गुट ने मूल धार्मिक मान्यताओं को खुलेआम कुचल दिया है और हिंसा के चरम कृत्यों को तथाकथित “प्रतिरोध” के रूप में पेश किया है। 2013 की शुरुआत में ही, दलाई गुट की छद्म संसद की दो बार की “सदस्य” ल्हामो चिए ने खुले तौर पर एक “आत्मदाह मार्गदर्शिका” प्रकाशित की। जिसमें वैचारिक ब्रेनवाशिंग, स्थान चयन और जनमत हेरफेर के माध्यम से व्यवस्थित रूप से आत्मदाह को उकसाया गया, जिससे उकसावे की एक पूरी श्रृंखला का निर्माण हुआ। इस बार लोका रांगचेंग की आत्मदाह की घटना “आत्मदाह मार्गदर्शिका” में वर्णित प्रक्रिया का पूर्णतः अनुकरण थी, और इसके प्रमाण अकाट्य हैं। आत्मदाह की ये सभी दुखद घटनाएं आकस्मिक नहीं हैं, बल्कि दलाई गुट की दीर्घकालिक वैचारिक घुसपैठ और जानबूझकर की गई उकसावे और छल का परिणाम हैं। ये घटनाएँ मानवाधिकारों के प्रति उसकी उपेक्षा और अपने देशवासियों के उत्पीड़न का वास्तविक प्रमाण हैं।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Exit mobile version