अष्टमी पर महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब…भस्म आरती में हजारों श्रद्धालुओं ने किये बाबा महाकाल के दर्शन

Bhasma Aarti

अष्टमी पर महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। गुरुवार सुबह भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। मंदिर परिसर “जय महाकाल” के जयकारों से गूंज उठा और भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

भोर से ही लगी श्रद्धालुओं की कतार

ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्त मंदिर के बाहर लंबी कतारों में खड़े होकर बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा करते नजर आए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर द्वार खोले गए, जिसके बाद पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई।

विधि-विधान से हुआ जलाभिषेक और पंचामृत स्नान

महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा सबसे पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का मिश्रण शामिल होता है। यह प्रक्रिया शिवभक्ति की पवित्रता और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है।

भव्य भस्म आरती का आयोजन

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अभिषेक के बाद प्रसिद्ध भस्म आरती का आयोजन हुआ, जो महाकाल मंदिर की सबसे खास परंपराओं में से एक है। इस आरती में शिवलिंग पर विशेष भस्म चढ़ाई जाती है। यह भस्म कपिला गाय के कंडों की राख और विशेष लकड़ियों को जलाकर तैयार की जाती है।

करीब ढाई किलो भस्म से बाबा का अभिषेक किया जाता है, जिसे वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जो इस अनुष्ठान को और भी दिव्य बना देता है।

परंपराओं का सख्ती से पालन

भस्म आरती के दौरान महिलाओं के लिए घूंघट करना और पुरुषों के लिए धोती पहनना अनिवार्य होता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है।

बाबा का अद्भुत श्रृंगार

आरती के बाद बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। उनके माथे पर चांदी का त्रिपुंड लगाया गया और फूलों की मालाएं, बेलपत्र तथा चंदन से सजाया गया। इसके बाद कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया।

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

महाकाल मंदिर की भस्म आरती और महाकाल लोक कॉरिडोर दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां इस दिव्य अनुष्ठान को देखने पहुंचते हैं।

धार्मिक महत्व

महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। बाबा महाकाल को ‘मृत्यु लोक का राजा’ कहा जाता है, जिनकी पूजा से भय और संकट दूर होने की मान्यता है।

अष्टमी के पावन अवसर पर महाकाल दरबार में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आस्था और विश्वास आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। भस्म आरती का दिव्य दृश्य हर भक्त के मन में अद्भुत शांति और ऊर्जा का संचार करता है। “हर हर महादेव” और “जय महाकाल” के जयघोष के साथ उज्जैन एक बार फिर भक्ति में डूबा नजर आया।

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