सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने देशभर में करोड़ों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2015 में शुरू की गई PM सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और PM जीवन ज्योति बीमा योजना ने अब 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के CM डॉ. यादव ने इन योजनाओं को सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इनसे गरीब, किसान, श्रमिक और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ा सहारा मिला है।
जन-सुरक्षा योजनाओं के 11 वर्ष
करोड़ों परिवारों को मिला सुरक्षा कवच
मध्यप्रदेश में बढ़ा भरोसा
पीएम सुरक्षा बीमा योजना
पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना
अटल पेंशन योजना के 11 साल
मुख्यमंत्री मोहन डॉ. यादव ने कहा कि जन-सुरक्षा योजनाओं का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक कम लागत में बीमा और पेंशन सुविधाएं पहुंचाना है। मध्यप्रदेश में राज्य सरकार बैंकिंग संस्थाओं, डाकघरों और संबंधित विभागों के समन्वय से यह सुनिश्चित कर रही है कि अधिक से अधिक पात्र लोगों तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक मजबूती प्रदान की है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन प्रक्रियाओं के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए भी नामांकन और दावा प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी हुई है।
कम प्रीमियम में बड़ा सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना आम नागरिकों के लिए जीवन बीमा का मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। इस योजना के तहत किसी भी कारण से मृत्यु होने पर 2 लाख रुपये तक का बीमा कवर दिया जाता है। योजना में 18 से 50 वर्ष तक के बैंक खाताधारक शामिल हो सकते हैं और इसका वार्षिक प्रीमियम केवल 436 रुपये निर्धारित किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 तक देशभर में इस योजना के तहत 27.43 करोड़ से अधिक लोगों ने नामांकन कराया है। अब तक 10.75 लाख से अधिक दावों के लिए 21,512 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का भुगतान किया जा चुका है। योजना में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है और 12.72 करोड़ से अधिक महिला हितग्राही इससे जुड़ी हैं।
हादसों में गरीब परिवारों का सहारा बनी सुरक्षा बीमा योजना
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना दुर्घटनाओं की स्थिति में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक राहत का बड़ा साधन बन रही है। योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर करीब 2 लाख रुपये तक की मदद प्रदान की जाती है, जबकि हादसों में आंशिक तौर पर दिव्यांग होने की स्थिति में पीड़ित को 1 लाख रुपये की सहायता केन्द्र सरकार की ओर से प्रदान की जाती है।
इस योजना में 18 से 70 वर्ष आयु वर्ग के बैंक खाताधारक शामिल हो सकते हैं और इसका वार्षिक प्रीमियम मात्र 20 रुपये है। अप्रैल 2026 तक योजना में 58.09 करोड़ से अधिक नामांकन दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं 1.84 लाख से अधिक दावों के लिए 3,667 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहद कम प्रीमियम में मिलने वाली यह सुरक्षा गरीब परिवारों के लिए संकट के समय बड़ी राहत साबित हो रही है। विशेष बात यह है कि योजना से 27.45 करोड़ से अधिक महिलाएं भी जुड़ चुकी हैं।
अटल पेंशन योजना से बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन
अटल पेंशन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन रही है। इस योजना में 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं जो आयकरदाता नहीं हैं। योजना के तहत नियमित अंशदान के बाद 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1 हजार रुपये से 5 हजार रुपये तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन दी जाती है।
इस योजना की खास बात यह है कि ग्राहक की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी को भी पेंशन का लाभ मिलता है और बाद में संचित राशि नामांकित व्यक्ति को प्रदान की जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2026 तक अटल पेंशन योजना में 9.04 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। योजना में महिलाओं की भागीदारी लगभग 49 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो सामाजिक सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
राज्य सरकार का कहना है कि ऑनलाइन जन-सुरक्षा पोर्टल और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं के जरिए योजनाओं की प्रक्रिया को अधिक आसान बनाया गया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी बैंक या डाकघर के माध्यम से सरलता से नामांकन करा पा रहे हैं और दावों का निपटारा भी पहले से अधिक तेज गति से हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है कि इन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।





