देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वां वेतन आयोग उम्मीदों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में उछाल और रोजमर्रा के खर्चों के बीच अब सभी की नजर सरकार की अगली वेतन व्यवस्था पर टिक गई है। माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। साथ ही जनवरी 2026 से मिलने वाले एरियर की रकम भी कर्मचारियों के खातों में बड़ी राहत बनकर पहुंच सकती है।
- अप्रैल 2027 से बढ़ सकती है सैलरी
- फिटमेंट फैक्टर पर टिकी कर्मचारियों की उम्मीद
- 15 महीने का एरियर बना सबसे बड़ा आकर्षण
- पेंशनर्स ने रखी 20 हजार पेंशन की मांग
- महंगाई के बीच आयोग पर बढ़ा दबाव
जानकारों और कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, अप्रैल 2027 से बढ़ी हुई सैलरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आयोग का प्रभाव 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा। ऐसे में कर्मचारियों को करीब 15 महीनों का एरियर एक साथ मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि सरकारी कर्मचारियों के बीच इस समय 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है।
दरअसल केंद्र सरकार हर दस साल में नए वेतन आयोग का गठन करती है। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था। उसी क्रम में 8वें वेतन आयोग की प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है। लेकिन आयोग की प्रक्रिया, रिपोर्ट तैयार करने और सरकार की मंजूरी में समय लगने के कारण इसके वास्तविक भुगतान में देरी संभव है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि आयोग को अपनी सिफारिशें मई 2027 तक सौंपने का समय दिया गया है। ऐसे में यदि प्रक्रिया तेजी से पूरी हुई तो अप्रैल 2027 से नई सैलरी लागू हो सकती है।
इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। यही वह आधार होता है जिसके जरिए कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना रखा गया था, जिसके बाद न्यूनतम बेसिक सैलरी 7 हजार रुपये से बढ़कर 18 हजार रुपये पहुंच गई थी। अब कर्मचारी संगठन इसे 3 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर सरकार 3 गुना फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी देती है, तो मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये से बढ़कर करीब 21,600 रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक फायदा इससे कहीं ज्यादा होगा, क्योंकि महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और दूसरे अलाउंस भी इसी के साथ बढ़ेंगे। यानी कुल इन-हैंड सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
एरियर को लेकर भी कर्मचारियों में खास उत्साह है। माना जा रहा है कि नई सैलरी भले ही 2027 में मिले, लेकिन इसका लाभ 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। ऐसे में कर्मचारियों को 12 से 15 महीनों तक का बकाया एकमुश्त भुगतान के रूप में मिल सकता है। हालांकि टैक्स विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि एक साथ बड़ी रकम मिलने से कई कर्मचारियों का टैक्स स्लैब बदल सकता है। सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स भी इस आयोग से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। पेंशनर्स संगठनों ने न्यूनतम पेंशन को मौजूदा 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग उठाई है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना यानी OPS को फिर से लागू करने की मांग भी तेज हो रही है। कई कर्मचारी संगठन यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS का विरोध करते हुए पुरानी व्यवस्था बहाल करने की पैरवी कर रहे हैं।
महंगाई की मार और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते सरकार पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। ऐसे माहौल में कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि आयोग जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपे ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिल सके।अब सबकी नजर केंद्र सरकार और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है। अगर उम्मीदों के मुताबिक फैसला हुआ तो आने वाले सालों में लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।