डिजिटल जनगणना का नया दौर शुरू
देश में जनगणना अब सिर्फ आबादी गिनने का काम नहीं रह गई है, बल्कि यह हर नागरिक की जीवनशैली का विस्तृत दस्तावेज बनने जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रही 16वीं जनगणना पहली बार पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में होगी, जिसमें नागरिकों की जानकारी टेक्नोलॉजी के जरिए सीधे सरकारी सिस्टम में दर्ज की जाएगी।
डिजिटल जनगणना का नया दौर शुरू
घर की छत ही नहीं अनाज तक की जानकारी
जनगणना 2026 में पूछे जा रहे ये 34 सवाल
हर घर की बनेगी डिजिटल कुंडली
इस बार जनगणना में सरकार ने 34 सवालों का ऐसा ढांचा तैयार किया है, जो किसी भी परिवार की पूरी तस्वीर सामने रख देगा। घर की छत किस मटेरियल की है, दीवारें कैसी हैं, फर्श कैसा है—इन सभी सवालों के जरिए हर घर की भौतिक स्थिति का डेटा तैयार किया जाएगा, जो भविष्य की योजनाओं का आधार बनेगा।
पहली बार खुद भरेंगे अपनी जानकारी
इस जनगणना की सबसे बड़ी खासियत “सेल्फ-एन्युमरेशन” सुविधा है। अब नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न सिर्फ प्रक्रिया पारदर्शी होगी, बल्कि लोगों को अपनी जानकारी पर अधिक नियंत्रण भी मिलेगा।
लिव-इन रिलेशन को मिली पहचान
इस बार जनगणना में एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी देखने को मिलेगा। अगर कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप में है और अपने रिश्ते को स्थिर मानता है, तो उसे शादीशुदा जोड़े की तरह गिना जाएगा। यह पहली बार है जब इस तरह के रिश्तों को सरकारी स्तर पर स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
दो चरणों में पूरा होगा अभियान
जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग’ होगा, जिसमें घर और उसकी सुविधाओं की जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़े विस्तृत आंकड़े इकट्ठा किए जाएंगे। यह पूरा अभियान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा।
2011 के बाद पहली बड़ी गणना
देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसके बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस बार डेटा संग्रहण का तरीका पूरी तरह बदल चुका है, जिससे आंकड़ों की सटीकता और उपयोगिता दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
घर से अनाज तक हर जानकारी
इस जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बेहद विस्तृत हैं। घर की बनावट, परिवार के मुखिया की जानकारी, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं, वाहन, मोबाइल, इंटरनेट और यहां तक कि घर में खाए जाने वाले मुख्य अनाज तक की जानकारी ली जाएगी। यह डेटा सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पूरा खाका पेश करेगा।
परिवार की पूरी प्रोफाइल तैयार
अधिकारियों द्वारा परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग (SC/ST/अन्य) जैसी जानकारी जुटाई जाएगी। इसके साथ ही मकान का मालिकाना हक, परिवार में रहने वाले सदस्यों की संख्या और विवाहित जोड़ों की संख्या जैसे सवाल भी पूछे जाएंगे।
सुविधाओं और संसाधनों की मैपिंग
जनगणना में घर की बुनियादी सुविधाओं पर भी खास फोकस रहेगा। पीने के पानी का स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय, रसोई, ईंधन और गंदे पानी की निकासी जैसी जानकारियां सरकार को यह समझने में मदद करेंगी कि किन क्षेत्रों में विकास की जरूरत है।
डिजिटल एसेट्स भी आएंगे दायरे में
आज के डिजिटल युग को देखते हुए इस बार जनगणना में तकनीकी संसाधनों को भी शामिल किया गया है। घर में टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जानकारी ली जाएगी, जिससे डिजिटल पहुंच का सही आकलन हो सके।
11000 करोड़ की विशाल प्रक्रिया
इतनी बड़ी जनगणना प्रक्रिया के लिए सरकार ने 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट स्वीकृत किया है। देशभर में अधिकारियों की नियुक्ति, ट्रेनिंग और फील्ड टेस्ट पूरे किए जा चुके हैं, ताकि डेटा संग्रहण में किसी तरह की कमी न रहे।
भवन नंबर से शुरू होगी गिनती
जनगणना की शुरुआत हर घर के भवन नंबर और मकान नंबर से होगी। इसके बाद घर की स्थिति, उपयोग और उसमें रहने वाले लोगों की संख्या जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। यह क्रमबद्ध प्रक्रिया डेटा को व्यवस्थित और सटीक बनाएगी।
गोपनीय रहेगा पूरा डेटा
सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। यह डेटा किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और इसे आरटीआई के दायरे से भी बाहर रखा गया है, ताकि नागरिकों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे।
नीतियों की दिशा तय करेगा डेटा
इस जनगणना से जुटाए गए आंकड़े आने वाले 10 वर्षों की सरकारी योजनाओं का आधार बनेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां इसी डेटा के आधार पर तैयार की जाएंगी।
जनभागीदारी से बनेगा मजबूत डेटा
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। सेल्फ-एन्युमरेशन के जरिए सही और सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी है, ताकि देश के विकास की योजना मजबूत आधार पर तैयार हो सके।





