सीजफायर के बाद भी तनाव बरकरार, अब आगे क्या?…अभी भी बने हुए हैं बेहद नाजुक

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सीजफायर के बाद भी तनाव बरकरार, अब आगे क्या?…अभी भी बने हुए हैं बेहद नाजुक

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब 40 दिनों से जारी सैन्य तनाव के बीच घोषित सीजफायर ने दुनिया को राहत की उम्मीद दी थी, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम का ऐलान किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों से मिसाइल हमलों और सैन्य गतिविधियों की खबरें आने लगीं। इससे साफ हो गया कि यह सीजफायर जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है और हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं।
युद्धविराम…हालात अभी भी बेहद नाजुक
जमीनी हालात अब भी विस्फोटक
क्या फिर भड़क सकता है संघर्ष?
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान ने भी इस अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के साथ आमने-सामने की वार्ता को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इसका मतलब यह है कि कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और बातचीत की दिशा अभी तय होनी बाकी है। इस बीच, दोनों देशों के बीच अविश्वास का माहौल पहले की तरह ही कायम है।
सीजफायर के बावजूद कुवैत, लेबनान और खुद ईरान के कई हिस्सों में हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर हालात अभी नियंत्रण में नहीं हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक दोनों देशों के बीच स्पष्ट और मजबूत समझौता नहीं होता, तब तक इस तरह की घटनाएं जारी रह सकती हैं। इजरायल की भूमिका भी इस पूरे समीकरण में अहम बनी हुई है, जो क्षेत्रीय तनाव को और जटिल बना रही है।
आगे की स्थिति को लेकर जो सबसे अहम संकेत मिल रहे हैं, वह पाकिस्तान की भूमिका से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान में आमने-सामने बैठकर बातचीत कर सकते हैं। पाकिस्तान इस पूरे विवाद में एक संभावित मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है। अगर यह वार्ता होती है, तो यह दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। हालांकि, यह भी साफ है कि ऐसी किसी भी वार्ता के सफल होने के लिए दोनों पक्षों को अपने रुख में लचीलापन दिखाना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ सैन्य या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सीजफायर की घोषणा के बाद कीमतों में थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन लगातार मिल रही हमलों की खबरों ने बाजार को फिर से अस्थिर कर दिया है। ऐसे में दुनिया भर के देशों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं।
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