Byju’s Crisis: कभी 22 बिलियन डॉलर की कंपनी, अब जेल तक पहुंचा मामला, जानिए कैसे टूटा भारत का सबसे बड़ा EdTech साम्राज्य

एक समय ऐसा था जब Byju’s को भारत के सबसे सफल स्टार्टअप्स में गिना जाता था। कंपनी का नाम क्रिकेट से लेकर शिक्षा जगत तक हर जगह छाया हुआ था। करोड़ों छात्रों और अभिभावकों ने ऑनलाइन शिक्षा के इस बड़े प्लेटफॉर्म पर भरोसा जताया। लेकिन अब वही कंपनी कानूनी विवाद, कर्ज, निवेशकों की नाराजगी और अदालतों के मामलों में घिर चुकी है। हालात इतने बिगड़ गए कि कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को सिंगापुर की अदालत ने कोर्ट आदेशों की अवहेलना के मामले में छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला अब भारत के सबसे बड़े स्टार्टअप पतन की कहानी बन चुका है।

शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के वादे के साथ शुरू हुआ था Byju’s का सफर

साल 2011 में Think & Learn Pvt Ltd के रूप में शुरू हुई Byju’s ने बहुत तेजी से पहचान बनाई। भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं और डिजिटल शिक्षा की बढ़ती मांग का कंपनी को बड़ा फायदा मिला। स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ कंपनी ने खुद को ऑनलाइन शिक्षा के भविष्य के रूप में पेश किया। फिर कोरोना महामारी आई और स्कूल बंद होने लगे। इसी दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की मांग तेजी से बढ़ी और Byju’s ने इसका सबसे ज्यादा फायदा उठाया। दुनियाभर के निवेशकों ने कंपनी में अरबों डॉलर का निवेश किया और 2022 तक कंपनी की वैल्यू लगभग 22 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

तेजी से विस्तार और अरबों डॉलर के अधिग्रहण ने बढ़ाया जोखिम

Byju’s ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी तेजी से विस्तार शुरू किया। कंपनी ने Aakash Educational Services, Great Learning और Epic जैसी बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया। इन डील्स पर करीब 3 बिलियन डॉलर खर्च किए गए। कंपनी ने बड़े विज्ञापन अभियान चलाए, क्रिकेट स्पॉन्सरशिप ली और कई सेलिब्रिटीज को ब्रांड प्रमोशन में जोड़ा। बाहर से सबकुछ शानदार दिख रहा था, लेकिन अंदर वित्तीय दबाव और प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ रही थीं।

1.2 बिलियन डॉलर के लोन के बाद शुरू हुई मुश्किलों की असली कहानी

नवंबर 2021 में कंपनी ने विदेशी निवेशकों से लगभग 1.2 बिलियन डॉलर का बड़ा टर्म लोन लिया। शुरुआत में इसे भारतीय स्टार्टअप सेक्टर की बड़ी उपलब्धि माना गया, लेकिन यही लोन बाद में कंपनी के संकट का सबसे बड़ा कारण बन गया। निवेशकों और लोन देने वाली संस्थाओं ने कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ऑडिट रिपोर्ट में देरी, रेवेन्यू आंकड़ों को लेकर विवाद और बढ़ते घाटे ने स्थिति और खराब कर दी। FY21 के आंकड़ों में कंपनी का घाटा करीब 4,588 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इसके बाद Deloitte और BDO जैसी बड़ी ऑडिट कंपनियों ने भी Byju’s से दूरी बना ली।

विदेशी अदालतों तक पहुंचा मामला और फंड ट्रांसफर पर उठे सवाल

समय के साथ Byju’s और उसके विदेशी लेंडर्स के बीच विवाद और गहराता गया। आरोप लगाए गए कि करीब 533 मिलियन डॉलर की रकम को सही जानकारी दिए बिना दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया। इसके बाद अमेरिका, सिंगापुर और दूसरे देशों में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ कंपनियों के जरिए करोड़ों डॉलर इधर-उधर किए गए, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। सिंगापुर की अदालत ने बाद में बायजू रवींद्रन को संपत्ति से जुड़े दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन कोर्ट के अनुसार इन आदेशों का पालन नहीं किया गया। इसी मामले में अब उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई है।

कर्मचारियों की सैलरी रुकी, निवेशकों का भरोसा टूटा और कंपनी की वैल्यू गिर गई

कानूनी विवादों के बीच कंपनी के अंदर भी हालात बिगड़ते गए। कर्मचारियों ने वेतन में देरी की शिकायत की, कई लोगों की नौकरी गई और कंपनी के बोर्ड से कई बड़े सदस्य बाहर हो गए। निवेशकों ने कंपनी प्रबंधन पर गलत फैसले लेने और खराब गवर्नेंस के आरोप लगाए। एक समय 22 बिलियन डॉलर की वैल्यू रखने वाली कंपनी की कीमत तेजी से गिरती चली गई। कुछ निवेशकों ने इसकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से भी कम आंकी। वहीं Forbes ने बायजू रवींद्रन की नेटवर्थ को शून्य तक कर दिया। हालांकि रवींद्रन का कहना है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और कई मामलों में समझौते की बातचीत चल रही है।

 

 

 

 

 

 

 

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