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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन: चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार हैं…

DigitalDesk by DigitalDesk
September 15, 2026
in स्पेशल
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BRICS summit China and India are partners rather than rivals
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चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार हैं

नई दिल्ली में पिछले सप्ताहांत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया
गया। इस दौरान कई द्विपक्षीय वार्ताएं भी हुईं, जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और
भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की भेंट-वार्ता सबसे ध्यानाकर्षक रही। दोनों नेताओं ने बातचीत में
इस पर अहम समानता बनायी कि चीन और भारत को साझेदार बनना चाहिए। स्थानीय
विश्लेषकों की नजर में यह समानता भावी चीन-भारत संबंधों के विकास का आधार है।
चीन और भारत के साझेदार बनने की प्राकृतिक शर्तें हैं। दोनों देश निकट पड़ोसी हैं। मैत्रीपूर्ण
आवाजाही का लंबा इतिहास है। दोनों प्राचीन सभ्यताओं ने एक दूसरे की शोभा में चार चांद
लगाये थे। आज दोनों देशों के सामने विकास और पुनरुत्थान का समान मिशन है। दोनों देशों
का अपना अपना शताब्दी लक्ष्य है। भारत को वर्ष 2047 में“विकसित भारत” विजन पूरा
करने की आकांक्षा है, जबकि चीन को वर्ष 2049 यानी नये चीन की स्थापना की सौवीं
वर्षगांठ तक समाजवादी आधुनिक शक्तिशाली देश का निर्माण पूरा करने की प्रतिबद्धता है।
विकास पर दोनों देश जन केंद्रित अवधारण पर बल देते हैं। विश्व में भारत वसुधैव कुटुम्बकम्
की वकालत करता है और चीन मानवता के साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की
अपील करता है, जो एक दूसरे से मिलते-जुलते हैं।
पर शर्तें संपन्न होने से प्रतीक्षित परिणाम स्वचालित रूप से नहीं आता। साझेदारी बनने से
दोनों पक्षों की समान कोशिशों की आवश्यकता है। चीन और भारत के लिए सब से अहम
बात एक दूसरे की सही समझ कर सही दिशा पर अडिग रहना है। चीनी राष्ट्रपति शी
चिनफिंग ने मुलाकात के समय कहा कि वस्तुगत और विवेकतापूर्ण रणनीतिक दृष्टिकोण से
सही दिशा तय करना है। चीन और भारत सहयोगी साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी। एक दूसरे
के लिए विकास का मौका है, न कि खतरा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी साफ कहा कि भारत चीन
के साथ प्रतिद्विंदी के बजाय साझेदार बनने को तैयार है।
चीन और भारत दोनों बड़े देश हैं। बड़े देशों के संबंधों के कई पहलू हैं और जटिल भी हैं, जो
स्वाभाविक बात है। बड़े देशों के संबंधों के विकास में रणनीतिक यानी समग्र और दूगामी
दृष्टि से मामलों का निपटारा काफी महत्वपूर्ण है, वरना अस्थाई स्थिति या किसी विशेष
घटना से वशीभूत होंगे और कई अच्छे मौकों से चूक जाएंगे।
दृष्टिहीन व्यक्तियों के हाथी छूने की कहानी का स्रोत प्राचीन भारत है, जो बौधधर्म के ग्रंथों
में लिखा गया। बाद में यह कहानी बौध धर्म के प्रसार से चीन में पहुंची और लोगों की जुबान
पर आई। इस नीति कथा का मूल अर्थ है कि हम किसी चीज के आंशिक भाग की समझ या

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संकीर्ण व्यक्तिगत अनुभव से उस चीज की सही पहचान नहीं करते। हम समग्र दृष्टि से सही
निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
निसंदेह सीमा सवाल चीन और भारत के संबंधों में एक संवेदनशील और कठिन सवाल है।
लेकिन वह द्विपक्षीय संबंध का सभी विषय नहीं है। उसे एक उचित स्थान पर रखा जाना
चाहिए। उल्लेखनीय बात है कि दोनों देश इस सवाल के समाधान में सक्रियता से कोशिश कर
रहे हैं। इस बार राष्ट्रपति शी ने अपना विचार रखा कि हम दविपक्षीय संबंध और सीमा
सवाल को दो पटरियों पर आगे बढ़ाएं ताकि वे एक दूसरे को बढ़ावा दें। इस तरह सीमांत क्षेत्र
में शांति और अमन-चैन कायम होगा।
गौरतलब है कि इस अगस्त में सीमा मुद्दे पर चीन और भारत के विशेष प्रतिनधियों की
25वीं बैठक में 8 सूत्रीय उपलब्धि समानताएं बनायीं। दोनों पक्ष वर्ष 2005 चीन भारत सीमा
सवाल के समाधान पर राजनीतिक निर्देशक सिद्धांत समझौते और बाद में विशेष
प्रतिनिधियों की समानताओं के मुताबिक समाधान ढांचे पर सलाह मशिवरा बढ़ाएंगे और दोनों
पक्षों के लिए न्यायपूर्ण, समुचित और दोनों के लिए स्वीकार्य योजना ढूंढेंगे। खास बात है कि
दोनों पक्ष सीमा निर्धारण विशेषज्ञ दल और सीमांत क्षेत्र नियंत्रण कार्य दल स्थापित करेंगे।
साझेदार बनने के लिए सहयोग और साझी जीत की भावना के मुताबिक एक-दूसरे की
सफलता को मदद देना चाहिए। भारत और चीन विश्व में दो सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश
हैं और दो सबसे बड़े विकासशील देश भी हैं। दोनों देशों के प्रचुर मानव संसाधन और विशाल
बाजार हैं। दोनों के बीच व्यावहारिक सहयोग चलाने की अपार संभावनाएं हैं। मसलन भारत
मेक इन इंडिया पर जोर देता रहता है। मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर का तेज विकास विकसित
भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक अहम कार्य है। इस संदर्भ में चीन विश्व में सबसे
बड़ा विनिर्माण देश है और विश्व में सबसे संपूर्ण औद्योगिक उत्पादन श्रृंखला है। दोनों देशों
में घनिष्ठ सहयोग चलाने की मजबूत निहित शक्ति है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, निवेश,
फिनटेक, एआई और आदि क्षेत्रों में दोनों देश बहुत कुछ कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों की
जनता को लाभ मिलेगा।
साझेदार बनने के लिए दोनों देशों को बहुपक्षीय मंच पर समन्वय व सहयोग बरकरार रखना
चाहिए। कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चीन और भारत के समान या करीब विचार हैं। पारस्परिक
समन्वय की मजबूती से अपने अपने कल्याण और व्यापक विकासशील देशों के हितों की
बेहतर सुरक्षा की जा सकती है, जिसका वैश्विक महत्व है। इस साल चीन ने भारत के ब्रिक्स
अध्यक्ष देश के कार्य और शिखर सम्मेलन के आयोजन का पूरा समर्थन किया। शिखर
सम्मेलन के नयी दिल्ली घोषणा पत्र ने विश्व भर में ब्रिक्स देशों की आवाज बुलंद की है।

अगले साल चीन ब्रिक्स अध्यक्ष देश होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता में कहा कि भारत चीन
के ब्रिक्स अध्यक्ष देश होने का पूरा समर्थन करेगा।
शी चिनफिंग और मोदी के बीच कजान वार्ता से चीन-भारत संबंधों की बहाली शुरू हुई,
थ्येनचिन वार्ता से चीन-भारत संबंधों की उन्नति हुई। नई दिल्ली वार्ता से चीन भारत संबंधों
को नयी प्रेरणा मिली है। अगर दोनों पक्ष साझेदार बनने की समानता को बखूबी अंजाम देंगे,
तो चीन-भारत संबंध निश्चय ही अधिक बड़ी प्रगति प्राप्त करेंगे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Tags: #BRICS summit China and India are partners rather than rivals
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