18वां ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर तक भारत की राजधानी नई दिल्ली में
आयोजित किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स सहयोग तंत्र की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ
के अवसर पर हो रहा है। साथ ही, विस्तार के बाद “वृहद ब्रिक्स सहयोग” के गहन विकास के लिहाज़
से भी यह एक महत्वपूर्ण वर्ष है।
हाल के दिनों में भारत, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और अन्य देशों के
मीडिया ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग की है। इन रिपोर्टों में ब्रिक्स को
उभरते बाजार और विकासशील देशों के बीच एकजुट सहयोग के महत्वपूर्ण मंच के रूप में पेश किया
गया है। साथ ही, ब्रिक्स के विकास में चीन के योगदान और उसकी भूमिका पर भी विशेष ध्यान
दिया गया है।
दक्षिण अफ्रीकी मीडिया ‘सेंट्रल न्यूज़’ ने ‘रामाफोसा: ब्रिक्स वैश्विक मंच पर बढ़ती महत्वपूर्ण
भूमिका निभा रहा है’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया। इसमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल
रामाफोसा के हवाले से कहा गया कि आज की दुनिया में युद्ध और तनाव के बीच ब्रिक्स सहयोग
तंत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। यह तंत्र विश्व शांति और विकास को बनाए रखने वाली एक
महत्वपूर्ण शक्ति बन गया है।
उधर, यूएई के मीडिया ‘इकोनॉमी मिडल ईस्ट’ ने बताया कि अबू धाबी के क्राउन प्रिंस 18वें ब्रिक्स
शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में यूएई और ब्रिक्स देशों के बीच
गैर-तेल व्यापार 312 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो वर्ष 2024 की तुलना में 28.5
प्रतिशत अधिक है। चीन कई वर्षों से यूएई का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना हुआ है। रिपोर्ट के
अनुसार, यह शिखर सम्मेलन वित्तीय सहयोग, ऊर्जा परिवर्तन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के
विकास जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
वहीं, इंडोनेशियाई समाचार एजेंसी “अंतारा” ने बताया कि इंडोनेशिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में
आर्थिक सहयोग और समावेशी वित्त से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देगा। इंडोनेशिया ब्रिक्स सहयोग
तंत्र का इस्तेमाल कर सदस्य देशों के साथ आर्थिक सहयोग को और बढ़ाना चाहता है।
इसी बीच, भारतीय समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) ने कहा कि 11 सदस्य देशों और 10
साझेदार देशों वाला “वृहद ब्रिक्स” विश्व बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति बन
गया है। चीन, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, ब्रिक्स के अधिकांश सदस्य देशों
का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन चुका है। भारत की प्रौद्योगिकी क्षमता, रूस के ऊर्जा
संसाधन, ब्राजील की कृषि शक्ति और दक्षिण अफ्रीका के खनिज संसाधन मिलकर ब्रिक्स को
मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रदान करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण की
चिंताओं और आवाज़ को सामने रखने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
इसके अलावा, ‘इंडिया टुडे’ ने अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी साक्स के हवाले से कहा कि अमेरिका
आज वैश्विक अस्थिरता का एक कारक बन गया है। ऐसे में भारत और चीन को मिलकर एक
अधिक संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने
कहा कि चीन लंबे समय से बहुपक्षवाद का समर्थन करता आया है और उसने कभी भी महाशक्ति
वाली नीति नहीं अपनाई, जो भारत के लिए भी जरूरी है।
बता दें कि चीनी वाणिज्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने अब तक 60 से
अधिक परिणाम दस्तावेज़ों पर सहमति जताई है। इनसे वैश्विक आर्थिक विकास और निष्पक्ष व
खुले अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है। ब्रिक्स में अब 11 सदस्य
देश और 10 साझेदार देश शामिल हैं। इन देशों की आबादी दुनिया की लगभग आधी है, जबकि
इनकी कुल आर्थिक हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी लगभग एक-
पांचवां हिस्सा है।
वर्ष 2025 के अंत तक, चीन का ब्रिक्स देशों में प्रत्यक्ष निवेश का स्टॉक 82 अरब अमेरिकी डॉलर
था। वहीं, वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में चीन का ब्रिक्स देशों में प्रत्यक्ष निवेश 4 अरब अमेरिकी
डॉलर रहा, जो मुख्य रूप से विनिर्माण, निर्माण और बिजली क्षेत्रों में गया। इसके अलावा, पिछले
पांच वर्षों में चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए 30 हजार से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)