मध्य प्रदेश में 8 नवंबर को नहीं होगी बारिश, भोपाल में 32 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान, रात में बढ़ेगी ठंड
मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज अब धीरे-धीरे बदल रहा है। नवंबर का महीना शुरू होने के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में सुबह और रात के समय ठंड महसूस होने लगी है। वहीं दोपहर में तेज धूप निकलने के कारण लोगों को गर्मी का भी सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के 7 नवंबर को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार 8 नवंबर को मध्य प्रदेश के सभी जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है। फिलहाल प्रदेश में बारिश, आंधी या बिजली गिरने को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
भोपाल में कैसा रहेगा मौसम?
राजधानी भोपाल में 8 नवंबर को आसमान मुख्य रूप से साफ रहने और सुबह हल्की धुंध छाए रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान करीब 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 13 से 16 डिग्री के बीच रहने के अलग-अलग पूर्वानुमान उपलब्ध हैं। ऐसे में सुबह और रात के समय हल्की ठंड महसूस हो सकती है, जबकि दोपहर में गर्मी बनी रह सकती है।
इन जिलों में बढ़ सकता है ठंड का असर
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी मध्य प्रदेश में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में लगभग 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। इससे रीवा, सतना, शहडोल और आसपास के इलाकों में सुबह-रात ठंड का असर बढ़ सकता है। प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी तापमान पर नजर बनी हुई है।
किसानों के लिए मौसम की जानकारी जरूरी
रबी फसलों की बुवाई के इस समय किसानों को मिट्टी में उपलब्ध नमी और तापमान को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनानी चाहिए। मौसम शुष्क रहने के कारण खेतों में सिंचाई की जरूरत फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय करनी होगी। किसानों को स्थानीय कृषि विभाग की सलाह का पालन करना चाहिए।
Diwali 2026: 8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानिए लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि
देशभर में 8 नवंबर 2026, रविवार को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। दीपावली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन लोग अपने घरों और दुकानों की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मान्यता है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस बार दीपावली को लेकर बाजारों में भी रौनक देखने को मिल रही है। लोग घरों को सजाने, मिठाइयां खरीदने और पूजा की तैयारियों में जुटे हैं।
8 नवंबर को है लक्ष्मी पूजा
पंचांग के अनुसार 8 नवंबर को अमावस्या तिथि रहेगी। दीपावली पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ग्वालियर के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार लक्ष्मी पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 54 मिनट से रात 7 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। यह समय स्थानीय पंचांग के अनुसार है। दूसरे शहरों में पूजा का समय कुछ मिनट अलग हो सकता है।
घरों और बाजारों में दिखेगी दीपावली की रौनक
दीपावली से पहले बाजारों में दीये, मोमबत्तियां, सजावट का सामान, रंगोली, मिठाइयां और पूजा सामग्री की खरीदारी बढ़ जाती है। लोग अपने घरों को रोशनी से सजाते हैं। कई जगहों पर बाजारों और दुकानों को भी आकर्षक लाइटों से सजाया जाता है। बच्चों में पटाखों और मिठाइयों को लेकर खास उत्साह रहता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजा का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली की शाम माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान घर के मंदिर और मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाए जाते हैं। लोग माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। भगवान गणेश की पूजा शुभ कार्यों की शुरुआत और विघ्नों को दूर करने के लिए की जाती है।
सुरक्षित तरीके से मनाएं त्योहार
दीपावली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, इसलिए इसे सुरक्षित तरीके से मनाना भी जरूरी है। पटाखे जलाते समय बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खुले स्थान पर ही आतिशबाजी करें और पानी तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखें। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कम धुएं वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर है। मिठाइयां खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और साफ-सफाई का ध्यान रखें।
Muhurat Trading 2026: दिवाली पर 8 नवंबर को खुलेगा शेयर बाजार, NSE और BSE पर इस समय होगी विशेष ट्रेडिंग
दिवाली के अवसर पर शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए 8 नवंबर 2026 का दिन खास रहने वाला है। रविवार होने के बावजूद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर मुहूर्त ट्रेडिंग का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। सामान्य दिनों में रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन दिवाली के मौके पर परंपरा के अनुसार निवेशकों को सीमित समय के लिए कारोबार करने का अवसर दिया जाता है। इस सत्र को मुहूर्त ट्रेडिंग कहा जाता है। निवेशकों के बीच इस विशेष कारोबारी सत्र को लेकर हर साल उत्साह रहता है।
दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगी ट्रेडिंग
एक्सचेंजों की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 8 नवंबर को विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक चलेगा। इससे पहले दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 20 मिनट तक प्री-ओपन सत्र आयोजित किया जाएगा। यानी निवेशकों को सामान्य कारोबारी दिन की तरह पूरे समय ट्रेडिंग का मौका नहीं मिलेगा। यह एक सीमित अवधि का विशेष सत्र होगा।
रविवार को क्यों खुलता है शेयर बाजार?
मुहूर्त ट्रेडिंग दिवाली के दिन आयोजित की जाने वाली एक विशेष परंपरा है। भारतीय निवेशक समुदाय में इसे नए वित्त वर्ष या नए कारोबारी वर्ष की शुभ शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली के आसपास नया संवत शुरू होता है। इसी वजह से कई निवेशक इस दिन शेयर खरीदकर नए कारोबारी साल की शुरुआत करना पसंद करते हैं।
निवेशकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?
मुहूर्त ट्रेडिंग को शुभ शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दिन खरीदे गए शेयरों से मुनाफा होना तय है। शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के साथ आता है। निवेशकों को किसी कंपनी के शेयर केवल परंपरा या बाजार में चल रही चर्चा के आधार पर नहीं खरीदने चाहिए। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, मूल्यांकन और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
Sugar Production: देश में चीनी उत्पादन बढ़कर 12.85 लाख टन पहुंचा, 184 मिलों ने शुरू किया पेराई का काम
भारत के चीनी उद्योग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। 2026-27 के नए चीनी विपणन वर्ष में देश में चीनी उत्पादन तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, नए विपणन वर्ष में अब तक चीनी का उत्पादन करीब 12.85 लाख टन पहुंच गया है। इस दौरान देश की 184 चीनी मिलों ने अपना काम शुरू कर दिया है। चीनी उत्पादन के शुरुआती आंकड़े किसानों, चीनी मिलों और बाजार से जुड़े कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
नए सीजन में उत्पादन की स्थिति
चीनी का नया विपणन वर्ष अक्टूबर से शुरू होता है। इस दौरान गन्ने की उपलब्धता और मिलों की पेराई क्षमता के अनुसार उत्पादन आगे बढ़ता है। ISMA की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, 2026-27 के शुरुआती चरण में लगभग 184 मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। इन मिलों के काम शुरू करने के बाद उत्पादन बढ़कर 12.85 लाख टन तक पहुंच गया है।
गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है यह खबर?
चीनी उद्योग का सीधा संबंध गन्ना किसानों से है। मिलों में पेराई शुरू होने से किसानों के गन्ने की खरीद और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जिन क्षेत्रों में चीनी मिलें सक्रिय हो जाती हैं, वहां किसानों को अपनी फसल बेचने का अवसर मिलता है। हालांकि, किसानों को भुगतान कब और कितना मिलेगा, यह संबंधित मिलों और राज्य सरकारों की व्यवस्था पर निर्भर करता है।
चीनी की कीमतों पर क्या पड़ सकता है असर?
देश में चीनी का उत्पादन घरेलू बाजार में आपूर्ति तय करने वाला प्रमुख कारक है। उत्पादन पर्याप्त रहने पर बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, उत्पादन में कमी होने पर कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा घरेलू खपत, निर्यात नीति, गन्ने की पैदावार और मिलों की उत्पादन क्षमता भी चीनी बाजार को प्रभावित करती है।
NHAI New Rules: हाईवे पर टोल वसूली की व्यवस्था बदलने की तैयारी, मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग के लिए जारी हुए नए दिशा-निर्देश
देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए टोल व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोलिंग व्यवस्था के डिजाइन और बुनियादी ढांचे को एक समान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य हाईवे पर टोल वसूली को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाना है। नई तकनीक के जरिए वाहनों को टोल भुगतान के लिए पारंपरिक टोल बूथ पर रुकने की जरूरत कम करने की दिशा में काम किया जाता है।
क्या है मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग?
मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें हाईवे पर वाहन चलते हुए ही इलेक्ट्रॉनिक तरीके से टोल भुगतान कर सकते हैं। इसके लिए सड़क पर आधुनिक कैमरे, सेंसर और वाहन पहचान करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। वाहन की पहचान होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत टोल शुल्क लिया जा सकता है।
NHAI ने क्यों जारी किए नए दिशा-निर्देश?
अलग-अलग हाईवे पर टोलिंग सिस्टम के डिजाइन और तकनीकी व्यवस्था में अंतर होने से संचालन में मुश्किलें आ सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए NHAI ने मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग के लिए डिजाइन और बुनियादी ढांचे को मानकीकृत करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे भविष्य में नई परियोजनाओं में एक जैसी तकनीकी व्यवस्था लागू करने में मदद मिल सकती है।
वाहन चालकों को क्या फायदा हो सकता है?
इस तरह की व्यवस्था का सबसे बड़ा संभावित फायदा टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना है। वाहन चालकों को बार-बार रुकने की जरूरत कम हो सकती है। इससे यात्रा का समय बच सकता है और ईंधन की खपत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि तकनीक किस तरह लागू होती है और भुगतान की व्यवस्था कितनी प्रभावी रहती है।