कूनो की ‘मुखी’ बनी सफलता की मिसाल, तीसरे जन्मदिन पर गूंजा गौरव
मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में जन्मी चीता ‘मुखी’ का तीसरा जन्मदिन वन्य-जीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताया।
भारत में चीतों की वापसी का प्रतीक बनी ‘मुखी’
29 मार्च 2023 को जन्मी ‘मुखी’ भारत में जन्मी पहली चीता है, जिसने अब तीन साल पूरे कर लिए हैं। उसकी यात्रा—एक नन्हे शावक से आत्मनिर्भर वयस्क और फिर माँ बनने तक—देश में चीतों की सफल पुनर्स्थापना की मजबूत कहानी कहती है।
कठिन शुरुआत, मजबूत इरादे
नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘ज्वाला’ से जन्मी मुखी चार शावकों में अकेली जीवित बची। भीषण गर्मी और शुरुआती चुनौतियों के बीच उसका जीवित रहना ही एक बड़ी उपलब्धि थी। वन्य-जीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी ने उसे नया जीवन दिया।
माँ ने ठुकराया, टीम ने संभाला
जन्म के बाद माँ ‘ज्वाला’ ने मुखी को अस्वीकार कर दिया था। ऐसे में वन विभाग की टीम ने उसे विशेष देखभाल में पाला। वैज्ञानिक पद्धतियों और निरंतर निगरानी ने उसे पूरी तरह स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाया।
दूसरी पीढ़ी की शुरुआत
नवंबर 2025 में मात्र 33 महीने की उम्र में ‘मुखी’ ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म देकर इतिहास रच दिया। यह भारत में जन्मे किसी चीते द्वारा पहली बार संतानों को जन्म देने की घटना है—जिससे देश में चीतों की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत हुई।
‘चीता परियोजना’ को मिली नई उड़ान
‘मुखी’ की सफलता ने चीता परियोजना को नई दिशा दी है। कूनो और गांधी सागर क्षेत्र में चीतों की संख्या अब 32 तक पहुंच चुकी है, जो इस परियोजना की सफलता का मजबूत संकेत है।
गांधी सागर में नया आवास
सरकार अब गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के लिए विकसित कर रही है। यहां ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ के जरिए नए आवास तैयार किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में चीतों को अतिरिक्त सुरक्षित क्षेत्र मिल सके। मध्यप्रदेश और राजस्थान मिलकर संयुक्त चीता संरक्षण परिसर विकसित कर रहे हैं। यह पहल क्षेत्रीय स्तर पर वन्य-जीव संरक्षण को नया आयाम देगी।
ईको-टूरिज्म से रोजगार
चीतों की बढ़ती संख्या से कूनो और चंबल क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिला है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
हाई-टेक निगरानी से सुरक्षा
चीतों की सुरक्षा के लिए रेडियो कॉलर, ड्रोन और फील्ड टीमों की मदद से 24×7 निगरानी की जा रही है। इससे उनके व्यवहार और पर्यावरण के अनुकूलन का वैज्ञानिक अध्ययन भी संभव हो रहा है। मुखी’ का तीसरा जन्मदिन केवल एक वन्य-जीव की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत में चीतों की वापसी की ऐतिहासिक यात्रा का मजबूत पड़ाव है। यह दिखाता है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, समर्पण और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ वन्य-जीव संरक्षण में नई ऊंचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं।