ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में आयोजित बोआओ फोरम पर्थ सम्मेलन में हरित विकास और सतत भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई। “हरित परिवर्तन: मानव और पृथ्वी के साझा भविष्य की ओर” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने चीन की स्वच्छ ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की खुलकर प्रशंसा की। उनका मानना था कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए चीन के अनुभव अन्य देशों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्र में चीन की प्रगति बनी चर्चा का केंद्र
सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की टीम ग्लोबल एक्सप्रेस की मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टीन होलगेट ने कहा कि चीन ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी नीतियां अपनाई हैं। उन्होंने विशेष रूप से नई ऊर्जा वाहनों को बढ़ावा देने, कर रियायतें देने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को उल्लेखनीय कदम बताया। उनके अनुसार, इन प्रयासों ने हरित परिवहन को नई गति दी है।
बैटरी, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा में चीन की उपलब्धियों की हुई सराहना
ऑस्ट्रेलिया के क्लाइमेट एनर्जी फाइनेंस थिंक टैंक के संस्थापक टिम बकले ने कहा कि बैटरी निर्माण, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चीन ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वहीं, स्मार्ट एनर्जी काउंसिल के सीईओ डेविड मैकएल्रिया ने कहा कि हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में चीन का बदलाव पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है और अन्य देशों को इससे सीख लेनी चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच हरित साझेदारी को मिला नया समर्थन
सम्मेलन में साझेदारी को विशेष महत्व दिया गया। ऑस्ट्रेलिया चाइना बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष राइस रॉबर्ट्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया पहले से ही चीनी सौर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग कर रहा है। उनका मानना है कि चीनी तकनीक और अनुभव ऑस्ट्रेलिया की हरित अर्थव्यवस्था को और मजबूत बना सकते हैं।
हरित उद्योगों में संयुक्त सहयोग से दोनों देशों को मिल सकते हैं नए अवसर
फोर्टेस्क्यू के कार्यकारी अध्यक्ष एंड्रयू फॉरेस्ट ने कहा कि खनन, इस्पात और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में हरित परिवर्तन के लिए चीन और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और चीन की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला व तकनीकी दक्षता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकती है।





