बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बैंक अधिकारियों से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सभी को हैरान कर दिया। महुआ और जंदाहा प्रखंड के दो पेंशनधारियों के बैंक खातों में अचानक करोड़ों और अरबों रुपये दिखाई देने लगे। यह जानकारी तब सामने आई जब दोनों लाभार्थी अपनी सामाजिक सुरक्षा पेंशन निकालने ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) पहुंचे। खातों में असामान्य राशि दिखाई देने के बाद बैंक ने तत्काल सतर्कता बरती और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल संबंधित खातों पर रोक लगा दी गई है।
पेंशन निकालने पहुंचे तो खाते में दिखी 7 अरब से ज्यादा की राशि, सभी रह गए हैरान
महुआ प्रखंड के चखाजे गांव निवासी वृद्ध पेंशनधारी चंद्रदीप राय अपनी 1,100 रुपये की पेंशन निकालने सीएसपी पहुंचे थे। लेनदेन के बाद जब उनके खाते का शेष बैलेंस देखा गया तो उसमें 7 अरब 40 करोड़ 68 लाख 72 हजार 795 रुपये से अधिक की राशि दर्ज दिखाई दी। इतनी बड़ी रकम देखकर ग्राहक सेवा केंद्र संचालक भी हैरान रह गया और उसने तुरंत बैंक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
दूसरे पेंशनधारी के खाते में भी 7 करोड़ से अधिक की रकम दिखाई दी
इसी तरह जंदाहा प्रखंड के खोपी गांव निवासी राजन सिंह के खाते में भी अचानक 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने लगी। दोनों घटनाएं लगभग एक ही समय सामने आने से बैंकिंग व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वास्तविक ट्रांजैक्शन था या केवल तकनीकी त्रुटि के कारण बैलेंस प्रदर्शित हो रहा था।
प्रशासन ने खातों पर लगाई रोक, अधिकारियों ने शुरू की जांच
मामले की सूचना मिलते ही बैंक अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने दोनों खातों पर एहतियातन रोक लगा दी। अधिकारियों ने लाभार्थियों को फिलहाल खातों से किसी प्रकार का लेनदेन नहीं करने की सलाह दी है। संबंधित दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी बड़ी राशि खातों में कैसे दिखाई दी।
तकनीकी गड़बड़ी की आशंका, जांच रिपोर्ट के बाद होगा पूरा खुलासा
प्रारंभिक स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि बैंकिंग सिस्टम, सर्वर या डेटा सिंक्रोनाइजेशन में किसी तकनीकी त्रुटि के कारण खातों में यह असामान्य बैलेंस दिखाई दिया। बीडीओ सौरव वर्णवाल ने पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। अब बैंक और संबंधित विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह तकनीकी गलती थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है।





