बिहार गोपालगंज। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में मंगलवार को हुए मिसाइल हमले ने भारत के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बिहार के गोपालगंज जिले के 31 वर्षीय नाविक रोहन कुमार की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तेल टैंकर पर हुए हमले में मौत हो गई। परिवार को उम्मीद थी कि चार महीने की समुद्री यात्रा पूरी कर रोहन सुरक्षित घर लौटेंगे, लेकिन अब उनका पार्थिव शरीर घर आने का इंतजार किया जा रहा है।
- होर्मुज़ हमले में बिहार का बेटा शहीद
- चार महीने बाद लौटने का वादा अधूरा
- गोपालगंज के रोहन की समुद्र में मौत
- मिसाइल हमले ने उजाड़ा पूरा परिवार
- भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर सवाल
रोहन कुमार पेशे से मर्चेंट नेवी में नाविक थे। वे तीन भाइयों में सबसे छोटे थे और अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। कुछ महीने पहले वे छुट्टी पर अपने गांव आए थे और परिवार के साथ समय बिताने के बाद 8 जून को दोबारा ड्यूटी पर लौटे थे। रवाना होने से पहले उन्होंने परिजनों से कहा था कि चार महीने का अनुबंध पूरा कर जल्द वापस आएंगे।
लेकिन मंगलवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुए हमले ने सब कुछ बदल दिया। ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास दक्षिणी समुद्री मार्ग से गुजर रहे दो अमीराती तेल टैंकर एमटी मोम्बासा और एमटी अल बहिया पर मिसाइल हमला हुआ। रोहन कुमार एमटी अल बहिया पर तैनात थे। हमले में उनकी मौत हो गई, जबकि कई अन्य भारतीय नाविक घायल हो गए। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई है।
गोपालगंज के जिला मजिस्ट्रेट समीर सौरभ ने रोहन की मौत की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से एक अधिकारी को परिवार के पास भेजा गया है ताकि पार्थिव शरीर को भारत लाने की आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। प्रशासन लगातार विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।
रोहन के बड़े भाई मनीष कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब पांच बजे कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया, जिसने इस दुखद घटना की जानकारी दी। पहले तो परिवार को विश्वास ही नहीं हुआ, लेकिन बाद में आधिकारिक पुष्टि होने पर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि जिस समुद्री यात्रा पर उनका भाई गया है, वह उसकी आखिरी यात्रा साबित होगी। रोहन के गांव और आसपास के इलाके में भी इस घटना से गहरा दुख है। ग्रामीणों के अनुसार रोहन मेहनती, मिलनसार और जिम्मेदार युवा थे। गांव के लोग अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए और परिवार को हर संभव आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
इस हमले के बाद भारत सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी राजनयिकों को तलब कर भारतीय नागरिकों पर हुए हमले को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना की पूरी जानकारी मांगी गई है।
समुद्री सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे दोनों तेल टैंकरों पर मिसाइलें दागी गईं, जिससे जहाजों में आग लग गई। बाद में आपातकालीन कार्रवाई के जरिए आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा पर भी व्यापक असर डालता है। रोहन कुमार की मौत ने एक बार फिर उन हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा सामने ला दिया है, जो दुनिया के विभिन्न समुद्री मार्गों पर कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। भारत के मर्चेंट नेवी कर्मी अंतरराष्ट्रीय व्यापार की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन संघर्ष वाले क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा हमेशा चुनौती बनी रहती है।
अब गोपालगंज में रोहन का परिवार सिर्फ एक ही इंतजार कर रहा है—अपने बेटे के पार्थिव शरीर के घर लौटने का। जिस युवा ने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए समुद्र का रास्ता चुना था, वह अब तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटेगा। यह घटना न केवल एक परिवार का दुख है, बल्कि उन सभी भारतीय नाविकों के साहस और जोखिम की भी याद दिलाती है, जो देश से दूर समुद्र में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।