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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: परसा सीट की दिलचस्प कहानी, 18 बार सिर्फ यादव उम्मीदवारों का दबदबा,,,जानें क्या है लालू के समधी की हार की कहानी

DigitalDesk by DigitalDesk
October 5, 2025
in पटना, बिहार, मुख्य समाचार, राजनीति
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Bihar Assembly Elections 2025
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025: परसा सीट की दिलचस्प कहानी, 18 बार सिर्फ यादव उम्मीदवारों का दबदबा
बिहार चुनाव 2025: परसा सीट पर यादवों का एकछत्र राज, 18 चुनावों में गैर-यादव उम्मीदवारों को नहीं मिली जीत
परसा सीट पर यादवों का दबदबा
बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों से भरी पड़ी है, लेकिन सारण जिले की परसा विधानसभा सीट ने एक अनोखा इतिहास रचा है। यहां अब तक हुए 18 विधानसभा चुनावों में किसी गैर-यादव उम्मीदवार की जीत नहीं हुई है। चाहे दल कोई भी रहा हो, मतदाताओं ने हमेशा यादव समुदाय के प्रत्याशी को ही विधानसभा तक भेजा है। फिलहाल यहां राजद (RJD) के छोटे लाल राय विधायक हैं, जिन्होंने लालू यादव के समधी चंद्रिका राय को 2020 में मात दी थी।

परसा सीट पर यादव दबदबा

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जातीय निष्ठा बनी जीत की चाबी
कृषि प्रधान है परसा इलाका
दारोगा प्रसाद राय की विरासत
चंद्रिका राय की लंबी पारी
लालू के समधी की हार
बीजेपी कांग्रेस का नहीं खाता

जातीय निष्ठा और सामाजिक समीकरण

परसा की राजनीति केवल चुनावी मुद्दों पर नहीं, बल्कि सामाजिक निष्ठा पर भी टिकी है। यहां की जनता नेताओं के दल बदलने या राजनीतिक पारी बदलने से प्रभावित नहीं होती। यह क्षेत्र गंगा और गंडक नदी के बीच बसा हुआ है, और यहीं की मिट्टी से जुड़े यादव परिवारों ने दशकों तक इस सीट पर राज किया है। सामाजिक दृष्टि से यहां यादव, कुर्मी और ब्राह्मण समुदायों की उपस्थिति है, पर मतदान में यादवों की एकजुटता सबसे मजबूत मानी जाती है।

कृषि प्रधान इलाका और आर्थिक स्थिति

परसा मुख्यतः कृषि प्रधान इलाका है। यहां धान, गेहूं, मक्का और दालों की खेती होती है। हाल के वर्षों में केले की खेती और डेयरी उद्योग ने भी रफ्तार पकड़ी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब पोल्ट्री और डेयरी फार्मिंग पर निर्भर होती जा रही है। एकमा सबडिवीजन मात्र 7 किमी दूर है, जबकि छपरा जिला मुख्यालय 42 किमी और पटना 60 किमी की दूरी पर है। परसा बाजार व्यापारिक दृष्टि से सक्रिय केंद्र माना जाता है, जबकि गंगा घाट धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है।

दारोगा प्रसाद राय की विरासत

परसा सीट की राजनीतिक पहचान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय से जुड़ी हुई है। 1952 के पहले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दारोगा प्रसाद राय ने जीत दर्ज की और यह परंपरा कई वर्षों तक जारी रही। लगातार सात चुनावों तक कांग्रेस ने इस सीट पर विजय का परचम लहराया। जनता पार्टी के दौर में 1977 में रामानंद प्रसाद यादव ने इस परंपरा को तोड़ा, लेकिन जातीय समीकरण वही रहे — जीत यादव प्रत्याशी की झोली में ही गई।

चंद्रिका राय की लंबी पारी

1985 के चुनाव में परसा की जनता ने एक बार फिर दारोगा प्रसाद राय के पुत्र चंद्रिका राय पर भरोसा जताया। उन्होंने लगातार पांच चुनावों में जीत दर्ज की और परसा की राजनीति में अपने परिवार की मजबूत पकड़ बनाए रखी। इस दौरान उन्होंने समय-समय पर दल बदल भी किए — कांग्रेस से लेकर राजद और जदयू तक का साथ निभाया। बावजूद इसके, यादवों का यह पारंपरिक वोट बैंक हमेशा उनके साथ खड़ा रहा। 2015 में उन्हें छठी बार भी सफलता मिली, लेकिन 2020 में समीकरण बदल गए।

लालू के समधी की हार की कहानी

2020 का चुनाव परसा के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय ने राजद छोड़कर जदयू का दामन थामा, लेकिन यह फैसला उन्हें महंगा पड़ा। राजद उम्मीदवार छोटे लाल राय ने उन्हें बड़े अंतर से हराया। दिलचस्प बात यह है कि तेज प्रताप यादव और चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के वैवाहिक विवाद ने भी राजनीतिक असर डाला। जनता ने भावनात्मक रूप से छोटे लाल राय के पक्ष में मतदान किया।

बीजेपी और कांग्रेस का नहीं खुला खाता

परसा सीट पर अब तक भाजपा (BJP) का खाता नहीं खुला है। कांग्रेस की जीत की आखिरी याद 1985 में दर्ज है। इसके बाद से यहां पर जदयू और राजद के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, परसा की राजनीति किसी दल की नहीं, बल्कि जातीय निष्ठा की राजनीति है। यही कारण है कि आज तक कोई गैर-यादव प्रत्याशी यहां से विधानसभा नहीं पहुंच सका।

परसा का वोट जाति से जुड़ा भावनात्मक समीकरण

परसा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में यादव प्रभाव का प्रतीक बन चुका है। दारोगा प्रसाद राय से लेकर छोटे लाल राय तक, यह सीट यादवों की परंपरा और राजनीतिक चेतना को दर्शाती है। दल बदलने, रिश्तों के बदलने या राजनीतिक ध्रुवीकरण के बावजूद, परसा का यादव वोट बैंक कभी नहीं टूटा। 2025 का चुनाव एक बार फिर इस बात की परीक्षा होगा कि क्या परसा अपने 18 चुनावों की परंपरा को 19वीं बार भी जारी रखेगा, या इस बार कोई नया इतिहास रच जाएगा। (प्रकाश कुमार पांडेय)

Post Views: 540
Tags: # Parsa seat Yadav candidates dominating 18 times#Bihar Assembly Elections 2025#Parsa seat interesting story
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