बिहार की नीतीश कुमार Nitish Kumar सरकार ने ग्रामीण विकास को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की 1069 ग्राम पंचायतों में पंचायत सरकार भवन बनाने का निर्णय लिया गया है। इन भवनों का निर्माण ग्राम पंचायतें स्वयं करेंगी। जिससे स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिलेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।
व्यय और लागत का विवरण
राज्य में पंचायत भवनों के निर्माण पर करीब 24 अरब 81 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी।। जिसमें सुधा होल-डे मिल्क पार्लर के निर्माण पर करीब 24.53 करोड़रुपये खर्च होंगे।। कुल 25 अरब 06 करोड़ 43 लाख 94 हजार 588 रुपये पूरी योजना पर खर्च होंगे।
निर्माण की जिम्मेदारी और समयसीमा
राज्य की कुल 8053 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण योजना चलाई जा रही है। अब तक 2000 पंचायत भवनों का निर्माण स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAEO) और 2615 भवनों का निर्माण भवन निर्माण विभाग के माध्यम से हो रहा है। अब शेष 1069 पंचायतों को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्राम पंचायतों को 9 माह के भीतर भवनों का निर्माण पूरा करना है।
वित्तीय सहायता और निगरानी व्यवस्था
निर्माण कार्य प्रारंभ होते समय 5% राशि “मोबिलाइजेशन एडवांस” के रूप में पंचायत को दी जाएगी। यह राशि अगली पांच किस्तों में समायोजित की जाएगी, जिससे निर्माण में सुविधा होगी। सुधा पार्लर निर्माण की निगरानी हेतु जिला स्तर पर एक समिति बनाई गई है। ज़िलाधिकारी समिति के अध्यक्ष होंगे।
जबकि उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (राजस्व), LAEO के अभियंता, जिला पंचायत राज पदाधिकारी सदस्य होंगे।
पंचायत सरकार भवन का उद्देश्य और उपयोगिता
यह भवन मिनी सचिवालय की तरह कार्य करेंगे। यहां सभी विभागों के कर्मचारियों के लिए कार्यालय की व्यवस्था होगी। RTPS केंद्र भी पंचायत भवन में संचालित होंगे, जिनसे ग्रामीणों को अब जाति, आय, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड आदि के लिए प्रखंड नहीं जाना पड़ेगा। इससे सरकारी सेवाएं “डोर स्टेप डिलीवरी” के रूप में मिलेंगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।
सुधा होल-डे मिल्क पार्लर का उद्देश्य
ग्रामीण क्षेत्रों में दूध और डेयरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। स्थानीय रोजगार और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन देना। बिहार सरकार का यह निर्णय पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने, ग्राम स्तरीय प्रशासन को सशक्त करने और ग्रामीण जनता तक सरकारी सेवाओं की आसान पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावशाली कदम है। इन भवनों के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलेगी।





