महुआ बनाम राघोपुर: लालू परिवार की राजनीति में आया तूफान
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों—तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव—के बीच अब सियासी रिश्ते तनाव में आ गए हैं। अब तक राजनीतिक मंच पर एकजुट दिखने वाले दोनों भाइयों के बीच सीट बंटवारे को लेकर खुला टकराव शुरू हो गया है। तेजप्रताप ने अपनी पुरानी सीट महुआ से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। वहीं तेजस्वी के बारे में खबर है कि वो इस बार दो सीटों—राघोपुर और महुआ से चुनाव लड़ सकते हैं।
तेजस्वी के इस संभावित फैसले ने तेजप्रताप को खफा कर दिया है। तेजप्रताप ने साफ कहा कि अगर तेजस्वी महुआ से लड़ते हैं, तो वह राघोपुर से भी लड़ने को तैयार हैं। यानी अब दोनों भाई एक-दूसरे की पारंपरिक सीटों पर सीधी टक्कर देने का संकेत दे चुके हैं।
तेजप्रताप के तीखे तेवर: अब भाई नहीं, सियासी प्रतिद्वंद्वी!
राजनीति में अब तक खुद को ‘कृष्ण’ और तेजस्वी को ‘अर्जुन’ बताने वाले तेजप्रताप के तेवर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने न सिर्फ नई पार्टी बनाने का संकेत दिया है, बल्कि तेजस्वी के खिलाफ खुलकर बोलने भी लगे हैं। तेजप्रताप का कहना है कि तेजस्वी को राजनीति में लाने वाले वही हैं।
तेजप्रताप बोले—”जब मैं राजनीति में था, तेजस्वी तो दिल्ली डेयरडेविल्स से क्रिकेट खेलते थे।”
अब वे आरोप लगा रहे हैं कि पार्टी और परिवार से उन्हें कुछ ‘जयचंदों’ की साजिश के तहत बाहर किया गया।
हालांकि कुछ दिन पहले तक तेजप्रताप का रुख नरम था। जब तेजस्वी यादव के घर बच्चे का जन्म हुआ, तो उन्होंने भाई के लिए शुभकामनाएं दी थीं। लेकिन अब वही तेजप्रताप भाई के खिलाफ चुनाव लड़ने और अपनी पार्टी खड़ी करने की बात कर रहे हैं।
तेजस्वी का पलटवार: ‘वो ऑलराउंडर हैं, रील भी बनाते हैं और बांसुरी भी बजाते हैं’
जब मीडिया ने तेजस्वी यादव से तेजप्रताप के बयानों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने सीधा हमला न करते हुए तंज कसा।
तेजस्वी बोले— “तेजप्रताप ऑलराउंडर हैं। रील बनाते हैं, पायलट हैं, संत हैं, और बांसुरी भी अच्छा बजाते हैं। परिवार के लिए प्रोटेक्टिव भी हैं।”
उन्होंने तेजप्रताप की नई पार्टी की योजना पर भी टिप्पणी की— “कितनी पार्टी बनती है या कौन बनाता है, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।” तेजस्वी की यह बात कहीं न कहीं यह इशारा करती है कि वो तेजप्रताप को अब गंभीर सियासी चुनौती के रूप में नहीं देख रहे, बल्कि इग्नोर स्ट्रैटजी अपना रहे हैं।
बिहार देख रहा है: प्यार होगा या रार?
लालू यादव के दोनों बेटों की यह खुली राजनीतिक रार अब मीडिया और जनता की नजरों में है। जो भाई कभी साथ मिलकर विरोधियों को घेरते थे, वे अब एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं। अब सवाल ये है कि क्या बिहार की जनता विधानसभा चुनावों में ‘भाईचारा’ देखेगी या फिर भाई-भाई के बीच ‘महाभारत’? लालू यादव की चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम में और भी सस्पेंस जोड़ रही है। क्या वे हस्तक्षेप करेंगे या फिर राजनीति की इस लड़ाई को समय पर छोड़ देंगे? ये आने वाला वक्त बताएगा।