उत्तर प्रदेश में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। अब प्रदेश के सभी 75 जिलों के विकास खंड स्तर पर हर सप्ताह विशेष जन चौपाल आयोजित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य साफ है कि आम लोगों को छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के लगातार चक्कर न लगाने पड़ें और शिकायतों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही तेजी से हो सके।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में यह निर्देश जारी किए। सरकार का मानना है कि अगर अधिकारी सीधे गांव और कस्बों में जाकर लोगों की बात सुनेंगे तो समस्याओं का समाधान तेजी से होगा और प्रशासन पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। इस फैसले के बाद ग्रामीण इलाकों में नई चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि लंबे समय से लोग शिकायतों के समाधान में देरी की समस्या उठाते रहे हैं।
विकास खंड स्तर पर लगेगी साप्ताहिक चौपाल
नई व्यवस्था के तहत हर सप्ताह ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक चौपाल आयोजित की जाएगी। इन चौपालों में राजस्व, पुलिस, पंचायत, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और विकास विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। आम नागरिक सीधे अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रख सकेंगे और मौके पर ही समाधान का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का फोकस विशेष रूप से उन लोगों पर है जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से जिला मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाते। अब गांवों और छोटे कस्बों के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि चौपाल केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए।
जमीन विवाद से लेकर घरेलू हिंसा तक होगी सुनवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन चौपालों में केवल सामान्य शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी, बल्कि गंभीर मामलों को भी प्राथमिकता दी जाएगी। जमीन और राजस्व विवाद, कब्जे के मामले, इतना ही नहीं घरेलू हिंसा से लेकर पुलिस की ओर से एफआईआर न लिखने के साथ ही राज्य में अवैध वसूली और सरकार की योजनाओं में धांधली गड़बड़ी जैसी शिकायतों की सुनवाई होगी। इसके अलावा राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत योजना का लाभ न मिलने वाले लोग भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि पात्र लाभार्थियों को बिना किसी भ्रष्टाचार और देरी के सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
अफसरों को मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि अब केवल ऑनलाइन जवाब अपलोड कर शिकायत बंद करने की प्रवृत्ति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि कई मामलों में अधिकारी पोर्टल पर निस्तारण दिखा देते हैं, लेकिन जमीन पर समस्या जस की तस बनी रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और तय समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
त्योहारों को लेकर प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश
बैठक में आगामी गंगा दशहरा और बकरीद को लेकर भी कानून व्यवस्था की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि त्योहारों के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने में किसी तरह की लापरवाही न हो।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति नहीं होगी और प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके साथ ही सड़क जाम कर नमाज पढ़ने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और पहले से सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध बूचड़खानों और खुले में मांस बिक्री पर सख्ती
सरकार ने साफ-सफाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने खुले में मांस बिक्री रोकने और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि केवल वैध और नियमों के तहत संचालित बूचड़खाने ही काम करें।
इसके अलावा तय सीमा से अधिक पशु रखने वाले बूचड़खानों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिलों में पीस कमेटी की बैठकें बढ़ाने और संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि त्योहारों के दौरान माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।
भू-माफियाओं और अवैध खनन पर सरकार का एक्शन
मुख्यमंत्री ने बैठक में भू-माफियाओं और अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के भी आदेश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों और अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए।
इसके साथ ही बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त कार्रवाई कर ऐसे वाहनों की पहचान करने और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
सरकार का फोकस- गांव स्तर पर त्वरित समाधान
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सरकार का यह कदम सीधे ग्रामीण जनता से जुड़ाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। लंबे समय से शिकायत रही है कि गांवों के लोगों की समस्याएं ब्लॉक और तहसील स्तर पर लंबित पड़ी रहती हैं। ऐसे में नियमित जन चौपाल से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अब देखना होगा कि यह व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या वास्तव में गांव-गांव तक प्रशासनिक समाधान पहुंच पाता है या नहीं। फिलहाल मुख्यमंत्री के इस फैसले को प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।